एक व्यक्ति इब्राहिम इब्न अधम (रहमतुल्लाह अलैह) के पास आया और...
Ummah Post
14 October, 2021

एक व्यक्ति इब्राहिम इब्न अधम (रहमतुल्लाह अलैह) के पास आया और कहा, "कोई ऐसा तरीका बताइए जिससे मैं बड़े (गलत) काम करता रहूँ और मेरी पकड़ (जवाबदेही) न हो।" हज़रत इब्राहिम ने फ़रमाया, "पाँच बातें स्वीकार कर लो, फिर जो चाहे करो, तुम्हारी कोई पकड़ नहीं होगी।"

(१) पहला यह कि: जब तुम कोई गुनाह करो, तो ख़ुदा का रिज़्क (अन्न/आजीविका) मत खाओ। उसने कहा, "यह तो बहुत मुश्किल है क्योंकि राज़िक़ (अन्नदाता) वही है, फिर मैं कहाँ से खाऊँ?" फ़रमाया, "तो यह कब मुनासिब (उचित) है कि तुम जिसका रिज़्क खाओ, फिर उसी की नाफ़रमानी करो?"

(२) दूसरा यह कि: अगर तुम कोई गुनाह करना चाहो, तो उसके मुल्क (राज्य) से बाहर निकलकर करो। उसने कहा, "सारा मुल्क ही उसी का है, फिर मैं कहाँ निकलूँ?" फ़रमाया, "तो यह बात बहुत बड़ी (गंभीर) है कि जिसके मुल्क में रहो, उसी से बगावत करने लगो।"

(३) तीसरा यह कि: जब कोई गुनाह करो, तो ऐसी जगह करो जहाँ वह तुम्हें न देखे। उसने कहा, "यह तो बहुत ही मुश्किल है क्योंकि वह तो दिलों के भेद भी जानता है।" फ़रमाया, "तो यह कब मुनासिब है कि तुम उसका रिज़्क खाओ, उसके मुल्क में रहो और उसी के सामने गुनाह करो?"

(४) चौथा यह कि: जब मलकुल मौत (موت کا فرشتہ) तुम्हारी जान लेने आए, तो उससे कहना कि 'ज़रा ठहर जा, मुझे तौबा कर लेने दे।' उसने कहा, "वह मोहलत (समय) कब देता है?" फ़रमाया, "तो यह मुनासिब है कि उसके आने से पहले ही तौबा कर लो और इस वक्त को ग़नीमत (अवसर) समझो।"

(५) पाँचवाँ यह कि: कयामत के दिन जब हुक्म हो कि 'इसे दोज़ख़ (नरक) में ले जाओ', तो कहना कि 'मैं नहीं जाता।' उसने कहा, "वे तो ज़बरदस्ती भी ले जाएँगे।" फ़रमाया, "तो अब खुद ही सोच लो कि क्या गुनाह तुम्हें ज़्यादा अज़ीज़ (प्यारा) है?" वह व्यक्ति कदमों में गिर गया और सच्चे दिल से ताइब (तौबा करने वाला) हो गया।

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