*✍️ हम किस कदर अजीब लोग हैं!
मोहब्बत हम निभा नहीं सकते, नफ़...
Ummah Post
25 October, 2024

*✍️ हम किस कदर अजीब लोग हैं!

मोहब्बत हम निभा नहीं सकते, नफ़रत हम सह नहीं सकते। एहसास (सहानुभूति) हम में ज़िंदा नहीं रहा, एहतराम (सम्मान) हम में बाक़ी नहीं है। मेल-जोल से हम दूर भागते हैं, और हसद (ईर्ष्या) हम में भरी हुई है। ग़लती हमें स्वीकार नहीं करनी, और माफ़ी मांगना हमें तौहीन (अपमान) लगता है। इबादत की हमें ख़बर नहीं है, और मौत हमें याद नहीं है.....!"*

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हज़रत थानवी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं:
लेख

हज़रत थानवी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं:

मुदर्रिसीन (शिक्षकों) को चाहिए कि हर तालिब-ए-इल्म (छात्र) को पूरा अरबी पढ़ाना ज़रूरी न समझें, जिसके अंदर मुनासबत (योग्यता) देखें, और फ़हम-ए-सलीम (सही समझ) पाएँ, उसको सब किताबें पढ़ा दें, और जिसको मुनासबत न हो, या फ़हम-ए-सलीम न हो, उसको बक़द्रे-ज़रूरत (ज़रूरत के मुताबिक़) मसाइल पढ़ा कर कह दें कि जाओ...