टिकट: फ्री..... सीट: पक्की (यकीनी)..... नाम: अब्दुल्ला इब्न...
Ummah Post
8 November, 2021

टिकट: फ्री..... सीट: पक्की (यकीनी)..... नाम: अब्दुल्ला इब्न एडम..... उर्फियत: इंसान..... राष्ट्रीयता: मुसलमान..... पहचान: मिट्टी..... पता: पृथ्वी की सतह (रू-ए-ज़मीन)..... यात्रा की अवधि: कुछ सेकंड..... जिसमें कुछ पलों के लिए दो मीटर ज़मीन के नीचे प्रवास (ठहराव)..... आवश्यक निर्देश: सभी यात्रियों से अनुरोध है कि वे उन लोगों को अपनी नज़र में रखें, जो उनसे पहले आख़िरत (परलोक) की यात्रा पर जा चुके हैं..... इसी तरह हर पल उनकी नज़र विमान के पायलट 'मलकुल मौत' (موت کا فرشتہ) की तरफ होनी चाहिए..... अधिक जानकारी के लिए इन आवश्यक निर्देशों को ध्यान से पढ़ लें, जो किताब (क़ुरान) और रसूल की सुन्नत (ﷺ) में दर्ज हैं..... अगर इस सिलसिले में कोई सवाल हो, तो जवाब के लिए उम्मत के उलेमा (विद्वानों) से संपर्क करें..... हर यात्री अपने साथ कुछ मीटर सफ़ेद लट्ठा (कफ़न का कपड़ा) और थोड़ी सी रुई ले जा सकता है, लेकिन वह सामान जो मीज़ान (तराजू) में पूरा उतरेगा, वह नेक अमाल (अच्छे कर्म), सदक़ा-ए-जारिया (निरंतर दान), नेक औलाद और वह ज्ञान होगा जिससे बाद वाले लाभ उठा सकें..... इससे ज़्यादा यात्रा का सामान लाने की कोशिश की गई, तो उसके ज़िम्मेदार आप खुद होंगे.....

सभी यात्रियों से अनुरोध है कि वे उड़ान (परवाज़) के लिए हर समय तैयार रहें..... उड़ान के संबंध में अधिक जानकारी के लिए तुरंत अल्लाह की किताब और रसूल की सुन्नत (ﷺ) से संपर्क किया जाए..... इस सिलसिले में दैनिक पांच वक्त मस्जिद की हाज़िरी बेहद ज़रूरी और फ़ायदेमंद होगी.....

आपकी सुविधा के लिए अर्ज़ है कि आपकी सीट आरक्षित (रिज़र्व) हो चुकी है और इस सिलसिले में किसी री-कंफर्मेशन (पुष्टि) की आवश्यकता नहीं है..... उम्मीद है कि आप यात्रा के लिए तैयार होंगे..... हम इस मुबारक यात्रा पर आपका स्वागत करते हैं..... हमारी नेक दुआएँ आपके साथ हैं। (बिखरे मोती)

Share this article
अल्लामा इकबाल का हुज़ूर ﷺ से गहरा प्रेम और आज्ञापालन
लेख

अल्लामा इकबाल का हुज़ूर ﷺ से गहरा प्रेम और आज्ञापालन

शायर-ए-मशरिक़ (पूर्व के कवि) अल्लामा मोहम्मद इकबाल ने सुन्नत-ए-रसूल (पैगंबर की परंपरा) के पालन को अपना शियोवा-ए-हयात (जीवन का तरीका) बना लिया था। "जौहर-ए-इक़बाल" में एक अजीब और बसीरत अफ़रोज़ (ज्ञानवर्धक) घटना का वर्णन किया गया है, जिससे अल्लामा इकबाल के जज़्बा-ए-शौक़ और इतात-ए-रसूल (रसूल के प्रति प्...