हज़रत सख़्र (रज़ियल्लाहु अन्हु) बहुत बड़े व्यापारी थे और चूंकि रसूलुल्लाह ﷺ ने दुआ फ़रमाई थी:
اللَّهُمَّ بَارِكْ لِأُمَّتِي فِي بُكُورِهَا
"ऐ अल्लाह! मेरी उम्मत को सुबह सवेरे के वक़्त में बरकत दे।"
इसलिए वह हमेशा अपने व्यापार का सामान सुबह सवेरे रवाना फ़रमाते थे और मुनासिब मुनाफ़ा (लाभ) कमाते थे।
(अबू दाऊद, किताब अल-जिहाद, बाब फ़ी अल-इब्तिकार फ़ी अस्-सफ़र)