"'वल-लैल' (रात की क़सम) में है मोहम्मद (ﷺ) की ज़ुल्फ़ों का तरन्...
Ummah Post
10 November, 2024

"'वल-लैल' (रात की क़सम) में है मोहम्मद (ﷺ) की ज़ुल्फ़ों का तरन्नुम (मधुरता),

'वश-शम्स' (सूरज की क़सम) में है अहमद (ﷺ) के रुख़सार (चेहरे) का तरन्नुम।

'वल-फ़ज्र' (सुबह की क़सम) में है सुब्ह-ए-रिसालत की बशारत (ख़ुशख़बरी),

'वल-अत्र' (ज़माने की क़सम) में है दौर-ए-नबुव्वत की बशारत।"

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इल्म (ज्ञान) का बदसूरत आशिक़
लेख

इल्म (ज्ञान) का बदसूरत आशिक़

असली नाम अम्र बिन महबूब था, 160 हिजरी में पैदा हुए और 'जाहिज़' के लक़ब (उपाधि) से मशहूर हुए। अरबी में जाहिज़ उसे कहते हैं जिसकी आँखों के ढेले (पुतलियाँ) बाहर की ओर उभरे हुए हों। शुरुआत में वे इस लक़ब को नापसंद करते थे, लेकिन रफ़्ता-रफ़्ता (धीरे-धीरे) ख़ामोश हो गए। शायद ही किसी के रूप-रंग का इस तर...