नाम मुहम्मद (ﷺ)... बहुत ही खूबसूरत और बेहद प्यारा नाम......
Ummah Post
3 December, 2021

नाम मुहम्मद (ﷺ)... बहुत ही खूबसूरत और बेहद प्यारा नाम...

ईमान (आस्था) से ज़्यादा मुक़द्दम (सर्वोपरि),

दीन (धर्म) से ज़्यादा मुक़द्दस (पवित्र),

फ़रिश्तों से ज़्यादा मासूम,

माता-पिता से ज़्यादा मोहतरम (आदरणीय),

माँ से ज़्यादा मेहरबान,

बाप से ज़्यादा शफ़ीक़ (स्नेही),

औलाद से ज़्यादा अज़ीज़ (प्रिय),

ज़िंदगी से ज़्यादा सजीला (सुंदर),

धड़कन से ज़्यादा क़ीमती,

जान से ज़्यादा प्यारा,

खून की गर्दिश (संचार) से ज़्यादा महबूब,

साँस से ज़्यादा मतलूब (वांछित),

शहद से ज़्यादा मीठा,

आब-ए-हयात (अमृत) से ज़्यादा ज़िंदगी बख़्शने वाला,

चश्मा-ए-कौसर से ज़्यादा पारदर्शी,

बच्चों से ज़्यादा मासूम,

जवानी से ज़्यादा पुरकशिश (आकर्षक),

अधेड़ उम्र (कहूलत) से ज़्यादा मुदब्बिर (बुद्धिमान),

बुढ़ापे से ज़्यादा संजीदा (गंभीर),

फ़ितरत (प्रकृति) से ज़्यादा खरा,

शबनम (ओस) से ज़्यादा पाकीज़ा (शुद्ध),

सुबह के उदय होने के मंज़र से ज़्यादा दिलकश,

शाम के ढलने से ज़्यादा सुहाना,

मौसम-ए-बहार (वसंत) से ज़्यादा शादाब (हरा-भरा),

नसीम-ए-सहरी (भोर की हवा) से ज़्यादा लतीफ़ (कोमल),

कली से ज़्यादा अफ़ीफ़ (पवित्र),

गुलाब से ज़्यादा शगुफ़्ता (खिला हुआ),

आसमान से ज़्यादा बेकराँ (असीम),

सूरज से ज़्यादा ताबिंदा (चमकदार),

किरण से ज़्यादा उजला,

चाँदनी से ज़्यादा लतीफ़ (नाज़ुक),

बर्क़ (बिजली) से ज़्यादा तवाना (शक्तिशाली),

बादल से ज़्यादा गौहरबार (बरसने वाला),

समुद्र से ज़्यादा राज़दार,

दरिया (नदी) से ज़्यादा सख़ी (दानी),

पहाड़ से ज़्यादा बुर्दबार (सहनशील),

चट्टान से ज़्यादा मज़बूत,

मोहब्बत से ज़्यादा लाज़वाल (अमर),

वक़्त से ज़्यादा जावेदाँ (शाश्वत),

लफ़्ज़ (शब्द) से ज़्यादा पायदार (स्थायी),

सच से ज़्यादा उस्तवार (दृढ़),

मोती से ज़्यादा मुनज़्ज़ह (निर्मल),

हक़ीक़त से ज़्यादा सच्चा,

अक़ीदत (श्रद्धा) से ज़्यादा सुच्चा,

इरादत (निष्ठा) से ज़्यादा बाकमाल,

हुस्न (सौंदर्य) से ज़्यादा मनमोहक,

मरहम से ज़्यादा आसूदगी (राहत) बख़्शने वाला,

शजर-ए-सायादार (छायादार पेड़) से ज़्यादा मुसाफ़िर-नवाज़,

शाख़-ए-समरबार (फलों से लदी शाख) से ज़्यादा कुशादा-दस्त (उदार),

अब्र-ए-करम (कृपा के बादल) से ज़्यादा ग़रीब-परवर,

हरारत (गर्मी) से ज़्यादा ऊर्जावान,

मुस्कुराहट से ज़्यादा बेरिया (निश्छल),

तख़्लीक़ (सृष्टि) से ज़्यादा बेसाख़्ता (स्वाभाविक),

इक़्तेदार (सत्ता) से ज़्यादा मुह्तशम (शानदार),

फ़ौलाद से ज़्यादा मज़बूत,

लाल व गौहर (मणियों और मोतियों) से ज़्यादा क़ीमती,

मआरिफ़ व फ़ज़ाइल (ज्ञान और सद्गुणों) के बेपनाह ख़ज़ानों से भरपूर।

ज़िंदगियाँ तमाम हुईं और क़लम टूट गए,

तेरे औसाफ़ (गुणों) का एक बाब (अध्याय) भी पूरा न हुआ।

महशूर के दिन शफ़ाअत-ए-मुहम्मदी (ﷺ) की दुआ का तालिब,

मौलाना अनस मेमन पालनपुरी अफ़ी अन्हु।

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बुद्धिमान और बुद्धिमानी
लेख

बुद्धिमान और बुद्धिमानी

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