मौजूदा तहरीकों (आंदोलनों) के सिलसिले में हज़रत (मौलाना अशरफ...
Ummah Post
4 December, 2023

मौजूदा तहरीकों (आंदोलनों) के सिलसिले में हज़रत (मौलाना अशरफ अली थानवी) ने फ़रमाया: "अगर तुम मज़ालिम (अत्याचारों) से बचने पर क़ादिर (सक्षम) नहीं हो, तो अपने आप को 'मक्की' (मक्का के दौर का) समझो और सब्र करो। और अगर क़ादिर हो, तो 'मदनी' (मदीना के दौर का) समझो और कुदरत (शक्ति) से काम लो। मगर अब तो यह हो रहा है कि या तो मक्की की जगह 'मक्खी' और ज़लील (अपमानित) बनेंगे, और या मदनी की जगह 'बदनी' (शारीरिक/पहलवान) बनेंगे और ख़तरात (खतरों) में फँसेंगे..."

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झूठी उम्मीद और अधूरे वादे का घातक अंजाम
लेख

झूठी उम्मीद और अधूरे वादे का घातक अंजाम

एक आदमी कई रातें सख्त सर्दी में आराम से सोता रहा। एक दिन किसी राहगीर ने गुजरते हुए उससे कहा: "मैं तुम्हें एक गर्म रज़ाई लाकर दूंगा"!! वह राहगीर अपनी मंज़िल को चला गया और रज़ाई लाने का वादा भूल गया, बूढ़ा आदमी उसका इंतज़ार करते हुए सर्दी से मर गया। लोगों को उसकी लाश के पास एक लिखा हुआ पर्चा (नोट)...