"इंसान की ज़िन्दगी की सबसे बड़ी सितम-ज़रीफ़ी (विडंबना) यह है कि वह झूठी तारीफ़ सुनकर बर्बाद होना पसंद करता है, लेकिन सच्ची तनक़ीद (आलोचना) सुनकर खुद को संभालना पसंद नहीं करता।" 💯✨
जब हज़रत अबू ज़र (रज़ियल्लाहु अन्हु) ने हज़रत बिलाल (रज़ियल्लाहु अन्हु) को कहा...
"ऐ काली-कलूटी माँ के बेटे! अब तू भी मेरी ग़लतियाँ निकालेगा...?"
बिलाल यह सुनकर ग़ुस्से और अफ़सोस से बेक़रार होकर यह कहते हुए उठे, "ख़ुदा की क़सम! मैं इसे ज़रूर ब-ज़रूर अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के...