दीन का ज्ञान (इल्म-ए-दीन) हासिल करना हर मुसलमान पर फ़र्ज़ है...
Ummah Post
7 December, 2023

दीन का ज्ञान (इल्म-ए-दीन) हासिल करना हर मुसलमान पर फ़र्ज़ है, चाहे वह औरत हो या मर्द; मगर आम तौर पर औरतों में दीन के ज्ञान की कमी और उसे हासिल करने की चाहत की कमी पाई जाती है। सहाबियात (महिला साथियों) और ताबियात को देखो, उनके अंदर दीन के ज्ञान की तलब (चाहत) और उसके लिए तड़प किस कदर थी? हदीस में ही आता है कि सहाबियात ने अल्लाह के रसूल (ﷺ) से अर्ज़ किया कि मर्द (दीन के मामले में) हम पर ग़ालिब आ गए हैं—यानी दीन की बातें सुनने और ज्ञान हासिल करने के मौके उन्हें ज़्यादा मिलते हैं—लिहाज़ा आप हमारे लिए भी एक दिन तय फ़रमा दीजिए (जिसमें आप हमें दीन की बातें सिखाएं)। चुनाँचे, आपने उनसे एक दिन का वादा फ़रमा लिया (एक दिन तय कर दिया)। इस हदीस से दीन के ज्ञान के सिलसिले में सहाबियात का शौक़ और ज़ौक़ मालूम होता है। हज़रत आयशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) ने एक मौक़े पर अनसार की औरतों की तारीफ़ करते हुए फ़रमाया: "बेहतरीन औरतें अनसार की औरतें हैं, जिन्हें हया और शर्म ने दीन में समझ-बूझ (तफ़क़्क़ुह) पैदा करने से बाज़ (दूर) नहीं रखा।"

देखिए, हज़रत आयशा ने अनसारी सहाबियात की तारीफ़ में फ़रमाया कि हया और शर्म के बावजूद वे दीन का ज्ञान हासिल करती थीं; इसलिए वे बेहतरीन औरतें हैं। चुनाँचे, बहुत से मसाइल (नियमों) की तहक़ीक़ात औरतों ने अल्लाह के रसूल (ﷺ) से की और आपने उनके जवाब दिए। हज़रत आयशा ने तमाम सहाबियात में सबसे ज़्यादा अहादीस (हदीसें) रिवायत की हैं। उनसे वर्णित अहादीस की संख्या दो हज़ार दो सौ दस (२२१०) है। और तमाम सहाबा इकराम में अधिकता से रिवायत करने के लिहाज़ से उनका छठा नंबर है। इब्न हजर (रह.) ने लिखा है कि सहाबा इकराम में से जलील-उल-क़द्र (महान) हज़रात भी हज़रत आयशा से मुश्किल मसाइल पूछा करते थे।

हज़रत आयशा के भांजे हज़रत उरवा ने फ़रमाया कि: "मैंने हज़रत आयशा से बढ़कर फ़िक़्ह (इस्लामी न्यायशास्त्र), तिब्ब (चिकित्सा/डॉक्टरी) और शायरी का जानने वाला किसी को नहीं देखा।" हज़रत इमाम ज़ुहरी (रह.) फ़रमाते हैं कि: "अगर तमाम सहाबियात का इल्म एक जगह रखा जाए और हज़रत आयशा का इल्म एक तरफ़, तो हज़रत आयशा का इल्म सब पर भारी हो जाएगा।" उदाहरण के तौर पर यहाँ सिर्फ़ हज़रत आयशा का ज़िक्र किया गया है, वरना इतिहास में सहाबियात और ताबियात की ज़िन्दगियों का जो नक़्शा दिया गया है, वह इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि वे सब की सब दीन के ज्ञान की खोज और तलाश में लगी रहती थीं और इसी तलब व जुस्तजू ने उन्हें ज्ञान के ऊंचे मक़ाम पर पहुँचाया।

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