"जब तक कोई औरत अपने बच्चों को इस्लाम का सही अक़ीदा (विश्वास) और मोहब्बत नहीं सिखाएगी, ये बच्चे दीन (धर्म) की ख़ातिर कभी कोई बड़ा काम नहीं कर सकेंगे। अगर कोई माँ चाहती है कि उसका बच्चा इस्लाम के लिए अज़ीम (महान) काम करे और फ़ातेहीन (विजेताओं) में शामिल हो, तो उसे चाहिए कि बच्चे को छोटी उम्र से ही इस्लाम और उसके दीन से मोहब्बत करना सिखाए, क्योंकि बच्चे माता-पिता के कामों से सीखते हैं।" 🥀👆
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