इमाम अहमद बिन हम्बल (रहमतुल्लाह अलैह) फ़रमाते हैं:
’’قَلَّ رَجُلٌ يَأْخُذُ كِتَابًا يَنْظُرُ فِيهِ إِلَّا اسْتَفَادَ مِنْهُ شَيْئًا‘‘
बहुत कम ही ऐसा होता है कि आदमी कोई किताब पकड़ता है मगर यह कि उस में से कुछ फ़ायदा पा लेता है।
यानी: जब भी कोई किताब खोलें तो उस में से ज़रूर फ़ायदा हासिल होता है। इसलिए किताबों का मुताला (अध्ययन) करते रहा करें।
(अल-इलाल व मआरिफ़तुर रिआल लि-अब्दुल्लाह बिन अहमद बिन हम्बल: 2393, तर्जुमा मफ़हूमन्)