*अल्लाह* *तआला* को वो लोग बहुत *पसंद* हैं
जो *गुनाह* हो जाने पर *तौबा* करते हैं' 🥀
अपनी गलती का *एतराफ़* (स्वीकार) कर लेते हैं 🥰
उसके आगे *झुक* जाते हैं'
वो *लोग* मैं और आप ही हैं जिनसे गलतियां होती हैं 🥹
*गुनाह* होते हैं ' 🥀❤️🩹
बस जब *गलती* का *एहसास* हो *फ़ौरन* तौबा कर लें
और बार-बार *खुद* को याद दिलाएं ऐसा अब नहीं करना! ✨
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