और उन बेज़ुबान क़ैदियों में से वो किताबें भी हैं जो तुमने ला...
Ummah Post
31 December, 2023

और उन बेज़ुबान क़ैदियों में से वो किताबें भी हैं जो तुमने लाकर अलमारी में बिन मुताला (बिना पढ़े) रखी हैं। गर्द-ओ-गुबार (धूल-मिट्टी) की तह चढ़ चुकी है; जीते जी क़ब्रिस्तान में मदफ़ून (दफ़्न) हैं। औराक़ (पन्ने) अपनी तबई (प्राकृतिक) ज़िंदगी के दिन काट रहे हैं, मगर बेरहम मुजाविर (रखवाले) को उन्सियत (लगाव) का ख़्याल तक नहीं गुज़रता और न यह कि अपनाइयत का भरम रखकर गर्द-ओ-गुबार झाड़कर आँखों से लगा ले, प्यार भरे लबों से बोसा (चूमना) देकर कुछ लम्हात के लिए ही सही मगर करे कुछ वरक़-गरदानी (पन्ने पलटना)।

- सरीर

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"मेरी ज़िंदगी में दो रातों के सिवा कोई रात ऐसी नहीं गुज़री जब मैंने इल्म (ज्ञान) की जुस्तजू (खोज) में कुछ साअतें (पल) किताब के साथ न गुज़ारी हों, पहली जब मेरे बाप का जनाज़ा उठा और दूसरी मेरी शादी की रात।"

- अश्-शेख़ अर-रईस अल-इमाम अबू अली हुसैन इब्न सीना (बू अली सीना)

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शैतान के फ़रेब के छह दरजात (चरण)
लेख

शैतान के फ़रेब के छह दरजात (चरण)

अल्लामा बद्रुद्दीन बिन शिबली अपनी मशहूर किताब "आकामुल मुर्जान फी अहकामिल जान" में नक़्ल करते हैं कि शैतान-ए-लईन (शापित शैतान) के इंसान को नुक़सान पहुँचाने के 6 दरजात हैं: (1) पहले मरहले (चरण) में वह इंसान को कुफ़्र व शिर्क में मुलव्विस (शामिल) करने पर मेहनत करता है, अगर इसमें उसे कामयाबी मिल जाए...