अफगानिस्तान में रूसी टैंकों के बाद फिलिस्तीन वह क्षेत्र है, जहां इजरायली टैंकों का कब्रिस्तान बन रहा है।
यह कुफ्र (काफिरों) की दुनिया की वह तकनीक है, जिस पर उन्हें घमंड होता है। और वे इसी घमंड में अंधे होकर अपनी जान जोखिम में डालकर मुजाहिदीन-ए-इस्लाम का शिकार बन जाते हैं।
इसी पर शायर-ए-मशरिक (पूर्व के कवि) अल्लामा मोहम्मद इकबाल (रहमतुल्लाह अलैह) ने कहा था:
अल्लाह को पामर्दी-ए-मोमिन (मोमिन की बहादुरी) पे भरोसा,
इब्लीस (शैतान) को यूरोप की मशीनों का सहारा।
इजरायल को गाजा में जारी जंग के दौरान अब तक होने वाला नुकसान लगभग 200 बिलियन शेकेल (51 बिलियन अमेरिकी डॉलर) तक पहुंच चुका है। यह नुकसान इजरायल के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के लगभग 10 प्रतिशत के बराबर है।