नंबर 1: सुबह का नाश्ता उपलब्ध है।
विवरण: नाश्ता सुबह ही किय...
Ummah Post
14 January, 2024

नंबर 1: सुबह का नाश्ता उपलब्ध है।

विवरण: नाश्ता सुबह ही किया जाता है। रात का नाश्ता या दोपहर का नाश्ता जैसी कोई चीज़ नहीं होती, इसलिए केवल यही सही है कि "नाश्ता उपलब्ध है।"

नंबर 2: झूठे आरोप (झूठे इल्ज़ामात)।

विवरण: क्या आपने कभी सच्चे आरोप सुने हैं?? नहीं?? तो सही शब्द भी केवल "आरोप" (इल्ज़ामात) ही है, न कि झूठे आरोप।

कहावतें/लोकोक्तियाँ (ज़रब-उल-मिसाल):

नंबर 1: आदमी आदमी पर गिरता है।

अर्थ: बहुत ज़्यादा भीड़, रश, या हुजूम होना।

प्रयोग: अंदरूनी शहर (पुराने शहर) का तो पूछिए ही मत, जहाँ आदमी आदमी पर गिरता है। ऐसी जगहों से दिल घबराता है, इत्यादि।

नंबर 2: पेट से पाँव निकालने लगे हैं।

अर्थ: ग़लत, नालायक या मर्यादा से बाहर की हरकतें करना।

प्रयोग: उधर मियां ज़हूर के बेटे को देखिए; कद अभी निकला नहीं और पेट से पाँव निकालने लगे हैं, इत्यादि।

शब्दावली (ज़ख़ीरा-ए-अल्फ़ाज़):

नंबर 1: तजाहुल-ए-आरिफ़ाना (تَجَاہلِ عَارِفَانہ)

अर्थ: जान-बूझकर अनजान या नासमझ बनना।

प्रयोग: नफ़ीसी साहब बड़े जिगर वाले (साहसी) आदमी हैं और तजुर्बेकार हैं, मगर अपने बेटे की बात पर तजाहुल-ए-आरिफ़ाना से काम ले रहे हैं (जान-बूझकर अनजान बन रहे हैं)।

नंबर 2: रफ़ी-उल-मर्तबत (رَفِیعُ الْمَرتَبَت)

अर्थ: ऊँचे मर्तबे वाला, ऊँची शान वाला।

प्रयोग: अपने ज्ञान (इल्म), कर्म (अमल) और विनम्रता (आजज़ी) के कारण सूफी साहब एक रफ़ी-उल-मर्तबत (उच्च श्रेणी की) शख़्सियत हैं।

Share this article
बाज़ और डाली – अपनी आंतरिक शक्ति को पहचानने की एक प्रेरक कहानी
लेख

बाज़ और डाली – अपनी आंतरिक शक्ति को पहचानने की एक प्रेरक कहानी

किसी ने एक बादशाह को तोहफ़े में शाहीन (बाज़) के दो बच्चे पेश किए। बादशाह ने दोनों को अपने शाहीनों के प्रशिक्षकों (ट्रेनर्स) के सुपुर्द कर दिया ताकि वे उन दोनों को ट्रेनिंग दें कि वे शिकार पर ले जाए जा सकें। एक महीने के बाद वह मुलाज़िम (कर्मचारी) बादशाह के पास हाज़िर हुआ और कहा कि एक शाहीन तो मुकम...