महिलाओं के बारे में वे पाँच बातें जो पुरुषों को अक्सर याद रहती हैं:
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إِنَّ كَيْدَ كُنَّ عَظِيمٌ (सूरा यूसुफ़, आयत: 28)
अनुवाद: बेशक, औरतों की चाल (साज़िश) बहुत ख़तरनाक होती है।
مَثْنٰى وَثُلٰثَ وَرُبٰع (सूरा अन-निसा, आयत: 3)
अनुवाद: दो-दो, तीन-तीन, चार-चार औरतों से निकाह (विवाह) करो।
الرِّجَالُ قَوَّامُونَ عَلَى النِّسَاءِ (सूरा अन-निसा, आयत: 34)
अनुवाद: मर्द, औरतों के संरक्षक (निगरान) हैं।
لِلذَّكَرِ مِثْلُ حَظِّ الْأُنْثَيَيْنِ (सूरा अन-निसा, आयत: 11)
अनुवाद: (विरासत/उत्तराधिकार में) मर्द के लिए दो औरतों के बराबर हिस्सा है।
نَاقِصَاتُ عَقْلٍ وَدِينِ (सहीह इब्न हिब्बान, हदीस नंबर: 3323, इसनाद सहीह)
अनुवाद: औरतें अक़्ल और दीन (धर्म) के मामले में नाक़िस (कमतर/अपूर्ण) होती हैं।
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महिलाओं के बारे में वे पाँच बातें जो पुरुषों को अक्सर याद नहीं रहतीं:
وَعَاشِرُوهُنَّ بِالْمَعْرُوفِ (सूरा अन-निसा, आयत: 19)
अनुवाद: औरतों के साथ भलाई और अच्छे तरीक़े से ज़िंदगी बसर करो।
لِيُنفِقُ ذُو سَعَةٍ مِّنْ سَعَتِهِ (सूरा अत-तलाक़, आयत: 7)
अनुवाद: हैसियत (कशादगी) वाला अपनी हैसियत के मुताबिक़ ख़र्च करे।
اسْتَوصُوا بِالنِّسَاءِ خَيْرًا (सुनन इब्न माजाह, हदीस नंबर: 1851, सहीह लि-ग़ैरिही)
अनुवाद: औरतों के साथ अच्छा बर्ताव (हुस्न-ए-सुलूक) करने के बारे में तुम वसीयत (सलाह) स्वीकार करो।
رِفْقًا بِالْقَوَارِيرِ (मुस्नद अल-हुमैदी, हदीस नंबर: 1209, इसनाद हसन)
अनुवाद: (औरतें काँच के बर्तनों की तरह हैं) इन काँच के बर्तनों के साथ नरमी से पेश आओ।
خَيْرُكُمْ خَيْرُكُمْ لَأَهْلِهِ (इब्न माजाह, 1977, सहीह लि-ग़ैरिही)
अनुवाद: तुममें से बेहतरीन व्यक्ति वह है जो अपने अहल-ओ-अयाल (परिवार) के लिए बेहतरीन हो।