मेरा जिस्म... मेरे अल्लाह की अमानत...
मेरी चादर... मेरी इज़...
Ummah Post
30 November, 2024

मेरा जिस्म... मेरे अल्लाह की अमानत...

मेरी चादर... मेरी इज़्ज़त...

मेरा घर... मेरा तहफ़्फ़ुज़ (सुरक्षा)...

मेरी चारदीवारी... मेरी सल्तनत...

मैं मुसलमान हूँ यह मेरी शान है...

मैं मुसलमान हूँ यह मेरा ईमान है...

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पड़ोसियों का सम्मान और बेमिसाल सादगी:
लेख

पड़ोसियों का सम्मान और बेमिसाल सादगी:

हज़रत मौलाना सैयद असग़र हुसैन रहिमतुल्लाह अलैह (जो अपने मिलने वालों में हज़रत मियां साहब के नाम से मशहूर थे) दारुल उलूम देवबंद के उन उस्तादों में से थे जो शोहरत और नाम-ओ-नमूद (دکھاوے) से हमेशा कोसों दूर रहे। उन्होंने जीवन भर इस्लामी उलूम (ज्ञान) की तदरीस (शिक्षण) की सेवा की और हज़ारों छात्रों को अपन...