इमाम अबू यूसुफ रहमतुल्लाह अलैह हारून रशीद के ज़माने में पूरे आलम-ए-इस्लाम के क़ाज़ी-उल-क़ुज़ात (मुख्य न्यायाधीश) थे, एक बार उनके पास ख़लीफ़ा हारून रशीद और एक नसरानी (ईसाई) का मुक़दमा आया, इमाम ने फ़ैसला नसरानी के हक़ में किया, इस तरह के दरख़्शां (चमकदार) वाक़यात तारीख़-ए-इस्लाम के वरक़-वरक़ (पन्ने-प...