*ख़ारदार (कँटीली) झाड़ियों पर;*
*ठहरी हुई बूंदों ने;*
*बस...
Ummah Post
16 January, 2025

*ख़ारदार (कँटीली) झाड़ियों पर;*

*ठहरी हुई बूंदों ने;*

*बस यही बताया है;*

*पत्तों ने तेरा साथ;*

*छोड़ दिया तो क्या?*

*क़ुदरत ने तुझे;*

*मोतियों से सजाया है...!!!*

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अपनी ज़िंदगी का जायज़ा
लेख

अपनी ज़िंदगी का जायज़ा

दुनिया में जो भी आया, कूच करने को आया। दफ़्न ख़ुद सैंकड़ों किए ज़ेर-ए-ज़मीन। फिर भी मरने का नहीं हक़-उल-यक़ीन। तुझसे बढ़कर कोई ग़ाफ़िल नहीं। कुछ तो इब्रत चाहिए ऐ नफ़्से लईन। ८. जब तुझे वह हादसा मौत का पेश आएगा जिसको कोई नहीं टाल सकता, तो माल-ओ-दौलत और नौकर-ओ-ख़ादिम तेरे कुछ भी काम न आएँगे।...