"अल्लाहुम्मा अहियनी मिस्कीनों व अमितनी मिस्कीनों वहशुरनी फ़ी...
Ummah Post
8 February, 2025

"अल्लाहुम्मा अहियनी मिस्कीनों व अमितनी मिस्कीनों वहशुरनी फ़ी ज़ुमरतिल-मसाकीनी यौमल-क़ियामाह।"

तरजुमा (अनुवाद): ऐ अल्लाह! मुझे मिस्कीन (विनीत/ग़रीब) ज़िंदा रखिए और मिस्कनत ही में मौत दीजिए और आख़िरत (क़यामत के दिन) में भी मिस्कीनों (मसाकीन) की जमात के साथ मेरा हश्र (पुनरुत्थान) हो।

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सहाबा इकराम (रज़ि.) के हुब्बे-नबी (नबी से मोहब्बत) की एक ख़ास दलील
लेख

सहाबा इकराम (रज़ि.) के हुब्बे-नबी (नबी से मोहब्बत) की एक ख़ास दलील

हम में से किसी भी इंसान की जवानी जब ढलने लगती है और वह अधेड़ उम्र की तरफ बढ़ने लगता है, तो अमूमन बाल सफ़ेद होने शुरू होते हैं। जब बाल सफ़ेद होना अभी शुरू ही हुए हों, तब अगर किसी इंसान से पूछा जाए कि आपके बदन में कितने बाल सफ़ेद हैं? तो बहुत मुश्किल है कि वह गिनती के साथ बता सके कि इतने बाल सफ़ेद हुए...