"जो कल तक दूसरों की ख़बरगीरी (देखभाल) करते थे, आज वे खुद बेख...
Ummah Post
25 March, 2025

"जो कल तक दूसरों की ख़बरगीरी (देखभाल) करते थे, आज वे खुद बेख़बर हैं... हालात बदलते वक़्त नहीं लगता।"

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कमाल है भाई!
लेख

कमाल है भाई!

हमारे घर के करीब एक बेकरी है। अक्सर शाम के वक्त काम से वापसी पर मैं वहां से सुबह नाश्ते के लिए कुछ सामान लेकर घर जाता हूं। आज जब सामान लेकर बेकरी से बाहर निकल रहा था कि हमारे पड़ोसी इरफान भाई मिल गए। वह भी बेकरी से बाहर आ रहे थे। मैंने सलाम-दुआ की और पूछा, "क्या ले लिया इरफान भाई?" कहने लगे, "कुछ नह...