"जब दुख शिद्दत (तीव्रता) अख्तियार कर जाएं, तो तब बोलने की ग़...
Ummah Post
25 March, 2025

"जब दुख शिद्दत (तीव्रता) अख्तियार कर जाएं, तो तब बोलने की ग़लती मत करना। यही लम्हात (पल) सब्र के होते हैं—वह लम्हे जब दोनों जहान का मालिक हमारे साथ हो जाता है। और जब वह साथ हो जाता है, तो इंसान को फ़र्श से अर्श (ज़मीन से आसमान) पर पहुँचा दिया जाता है। यह मौक़ा गंवाने का नहीं, सब कुछ पाने का होता है।" _💯💫

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नमाज़ की बरकत और इंसान की फ़ितरत
लेख

नमाज़ की बरकत और इंसान की फ़ितरत

आज फज्र के बाद मैं तिलावत (कुरान का पाठ) कर रहा था तो सूरह अल-मआरिज की एक आयत पर आकर रुक सा गया। बात इंसान की तख़्लीक़ (सृष्टि) के बारे में थी कि इंसान असल में पैदा कैसा हुआ है। आयत थी: "इन्नल इंसाने ख़ुलिक़ा हलूआ" (बेशक इंसान बहुत कम हौसला पैदा किया गया है) हक़ीक़त यह है कि इंसान में सब्र और...