"जब रिश्ता टूटा, तब समाज जगा!"
एक बहादुर दुल्हन ने सिर्फ इस वजह से शादी से इनकार कर दिया क्योंकि बारात में DJ और पटाखे बजाए गए — जबकि पहले ही साफ मना किया गया था।
क़ाज़ी साहब ने भी इस गैर-ज़रूरी रिवाज़ पर कड़ी फटकार लगाई और शादी को रुकवा दिया।
ऐसी लड़कियाँ अगर हमारे समाज में पैदा हो जाएं तो यकीनन मुआशरा तमाम बुराइयों से पाक हो जाएगा।
बुराई को रोकने की ज़िम्मेदारी सिर्फ उल्मा की नहीं, हम सबकी है।
खामोश रहना भी एक तरह की रज़ामंदी है।
आज आवाज़ उठाइए।