عربی سوم

ارشاد الحواشی شرح اردو اصول الشاشی
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تفہیم المتعلم شرح اردو تعلیم المتعلم
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الدرس الحاوی شرح اردو عقیدۃ الطحاوی
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مفتاح الصرف (مکمل)
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روضۃ المسلم شرح مقدمۃ المسلم
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تقریب التہذیب شرح شرح تہذیب (مفتی حبیب اللہ صاحب)
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نفحات التنقیح فی شرح مشکوۃ المصابیح (مکمل سیٹ)
نفحات التنقیح فی شرح مشکوۃ المصابیح (مکمل سیٹ)
اصول ہدایہ جلد ۳، ۴
اصول ہدایہ جلد ۳، ۴
اصول ہدایہ جلد ۱
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शैतान के तीन हथियार

शैतान के तीन हथियार

हज़रत सय्यिदुना वहब बिन मुनब्बिह रहमतुल्लाहि अलैह से नक़्ल है: बनी इसराईल का एक आबिद (इबादत करने वाला) अपने इबादतख़ाने में एक लंबे अरसे से इबादत में मशग़ूल था। वह मुजाहदे करता और हमेशा गुनाहों से बचता। उसकी इबादत और परहेज़गारी को देखकर शैतान के चेले इबलीस के पास आए और कहा: "फ़लां शख़्स ने हमें आजिज़ कर दिया है, हमें उससे कुछ हिस्सा नहीं मिला।" अपने कमीने चेलों की यह बकवास सुनकर इबलीसे लईन ने उस आबिद को बहकाने की ठानी और उसके इबादतख़ाने पर पहुँचकर दरवाज़ा खटखटाया। आबिद ने पूछा: "कौन है?" इबलीस बोला: "मैं मुसाफ़िर हूँ, आज रात मुझे अपने पास पनाह दे दो।" आबिद ने कहा: "यहाँ से बहुत ही क़रीब एक बस्ती है, तू वहाँ चला जा।" इबलीस ने कहा: "ख़ुदा का ख़ौफ़ करो, मैं मुसाफ़िर हूँ, मुझे दरिंदों और चोरों का ख़तरा है, इतनी रात गए मैं कहाँ मारा-मारा फिरूँगा।" आबिद ने कहा: "मैं हरगिज़ दरवाज़ा नहीं खोलूँगा।" यह सुनकर इबलीस ख़ामोश हो गया। कुछ देर बाद फिर दस्तक दी और कहा: "जल्दी से मेरे लिए दरवाज़ा खोलो।" आबिद ने पूछा: "कौन है?" कहा: "मैं मसीह (यानी ईसा अलैहिस्सलाम) हूँ।" (मआज़ल्लाह तआला) आबिद ने कहा: "अगर तू मसीह है तो फिर तुझे मेरी हाजत ही क्या है, तू तो अपने रब की रिसालत और आख़िरत के वादे को पहुँच चुका है।" इबलीसे लईन फिर ख़ामोश हो गया। कुछ देर बाद फिर शैतानी तबीअत मचली तो दरवाज़ा खटखटाया। आबिद ने पूछा: "कौन है?" कहा: "मैं इबलीस हूँ।" आबिद ने कहा: "मैं हरगिज़ तेरे लिए दरवाज़ा नहीं खोलूँगा।" इबलीसे लईन ने कहा: "तुझे ख़ुदा का वास्ता! तुझे तेरे रब का वास्ता! दरवाज़ा खोल दे।" इबलीसे लईन काफ़ी देर तक मिन्नत-समाजत करता रहा और पक्का वादा किया कि मैं तुझे कभी भी कोई नुक़सान नहीं पहुँचाऊँगा। आख़िरकार आबिद ने दरवाज़ा खोल दिया। इबलीस उसके सामने बैठ गया और कहा: "मुझसे जो पूछना चाहते हो पूछो, मैं तुम्हें हर सवाल का जवाब दूँगा।" आबिद ने कहा: "मुझे तुझसे कोई सरोकार नहीं।" यह सुनकर इबलीसे लईन वापस जाने लगा तो आबिद ने उसे पुकारकर कहा: "मैं तुझसे कुछ पूछना चाहता हूँ।" इबलीसे लईन वापस आया और कहा: "पूछो! क्या पूछना चाहते हो?" कहा: "बनी आदम की हलाकत में तुम्हारे लिए सबसे ज़्यादा मददगार चीज़ क्या है?" इबलीस ने कहा: "नशा हमारा सबसे कामयाब हथियार है, क्योंकि जब कोई शख़्स नशे में आ जाता है तो हम जो चाहते हैं उससे करवाते हैं, फिर वह हमसे बच नहीं सकता, हम उससे इस तरह खेलते हैं जैसे बच्चे गेंद से खेलते हैं।" आबिद ने कहा: "दूसरी हलाकत-ख़ेज़ चीज़ क्या है?" कहा: "ग़ुस्सा व ग़ज़ब भी हमारे मुहलिक तरीन हथियार हैं, अगर इंसान इबादत करके उस मक़ाम व मर्तबे को पहुँच जाए कि अल्लाह के हुक्म से मुर्दों को ज़िंदा करने लगे, तब भी हम उससे मायूस नहीं होते, हमें उम्मीद होती है कि उसके ग़ैज़ व ग़ज़ब की वजह से हमें उससे ज़रूर कुछ हिस्सा मिलेगा।" आबिद ने कहा: "इनके अलावा तुम्हारे पास और कौन सा मुहलिक हथियार है?" कहा: "बुख़्ल भी हमारा बेहतरीन हथियार है। इंसान पर जो नेमतें हैं हम उन्हें थोड़ी करके दिखाते हैं, और लोगों के पास जो माल व दौलत है उसे उसकी नज़रों में ज़्यादा कर देते हैं, इस तरह वह अपने माल में हुक़ूक़ुल्लाह की अदायगी के मामले में कंजूसी से काम लेता और हलाकत की वादियों में जा गिरता है।" (अल-अमान वल-हफ़ीज़) (उयूनुल हिकायात) मनक़ूल - ---------Islamic Tube Pro---------

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