عربی ہفتم دورہ حدیث شریف

تحفة القاری شرح صحیح البخاری جلد ٣
تحفة القاری شرح صحیح البخاری جلد ٣
تحفة القاری شرح صحیح البخاری جلد ٤
تحفة القاری شرح صحیح البخاری جلد ٤
تحفة القاری شرح صحیح البخاری جلد ٥
تحفة القاری شرح صحیح البخاری جلد ٥
تحفة القاری شرح صحیح البخاری جلد ٦
تحفة القاری شرح صحیح البخاری جلد ٦
تحفة القاری شرح صحیح البخاری جلد ٧
تحفة القاری شرح صحیح البخاری جلد ٧
تحفة القاری شرح صحیح البخاری جلد ٨
تحفة القاری شرح صحیح البخاری جلد ٨
تحفة القاری شرح صحیح البخاری جلد ٩
تحفة القاری شرح صحیح البخاری جلد ٩
تحفة القاری شرح صحیح البخاری جلد ١٠
تحفة القاری شرح صحیح البخاری جلد ١٠
تحفة القاری شرح صحیح البخاری جلد ١١
تحفة القاری شرح صحیح البخاری جلد ١١

कुछ सालेहीन के वफात के हालात :

कुछ सालेहीन के वफात के हालात :

❶. अज़ीम मुहद्दिस और उस्ताद-उत-तबीर इमाम मुहम्मद बिन सीरीन ؒ पर वफात के वक्त गिरिया तारी था और फरमा रहे थे कि "मुझे गुज़िश्ता ज़िंदगी की कोताहियाँ और जन्नत में जाने वाले आमाल में कमी और जहन्नुम से बचाने वाले आमाल की किल्लत पर रोना आ रहा है"। (किताब अल-आकिबते / 69) ❷. मशहूर फकीह और मुहद्दिस इब्राहिम नखई ؒ वफात के वक्त रोते हुए फरमा रहे थे "मैं अपने रब के कासिद का मुंतज़िर हूँ पता नहीं वह मुझे जन्नत की खुशखबरी सुनायेगा या जहन्नुम की?" ❸. हज़रत अबू अतिया अल-मज़बूह मौत के वक्त घबराने लगे लोगों ने कहा क्या मौत से घबराते हैं? फरमाया: मैं क्यों न घबराऊँ यह तो ऐसा वक्त है कि मुझे पता नहीं कि मुझे कहाँ ले जाया जाए (जन्नत या जहन्नुम)। ❹. हज़रत फुज़ैल बिन इयाज़ पर वफात के वक्त ग़शी तारी हुई फिर जब अफ़ाका हुआ तो फरमाया "हाय अफ़सोस! सफ़र दूर का है और तोशा बहुत कम है"। (किताब अल-आकिबते / 70)

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