عربی اول

بدر منیر شرح نحو میر
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عربی کا معلم مکمل
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آسان تعلیم النحو
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قواعد النحو (آسان اور مکمل)
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اشرف النبیین شرح اردو قصص النبیین جلد ۱
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اشرف النبیین شرح اردو قصص النبیین جلد ۲
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اشرف النبیین شرح اردو قصص النبیین جلد ۳
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توضیح متن العوامل المںٔۃ للجرجانی
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تدریب الصرف
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फ़ितना-ए-क़ादियानियत का पस-मंज़र (संक्षेप में)

फ़ितना-ए-क़ादियानियत का पस-मंज़र (संक्षेप में)

उपमहाद्वीप (पाक-ओ-हिंद) में जब अंग्रेज़ अपने ज़ुल्म-ओ-सितम और ज़्यादतियों के बावजूद मुसलमानों को मग़लूब (परास्त) न कर सका, तो उसने एक कमीशन के ज़रिए इसकी वजह मालूम करने के लिए पूरे हिंदुस्तान का सर्वे कराया। कमिशन ने यह रिपोर्ट पेश की कि मुसलमानों को मग़लूब करने के लिए उनके दिलों से जज़्बा-ए-जिहाद (जिहाद की भावना) मिटाना बेहद ज़रूरी है और इसका तरीक़ा-ए-कार (तरीका) यह हो सकता है कि यहाँ किसी ऐसे शख़्स से नबुव्वत (पैगंबरी) का दावा कराया जाए जो जिहाद को हराम और अंग्रेज़ की इताअत (आज्ञापालन) को लाज़िम (अनिवार्य) समझता हो। इस मक़सद के लिए अंग्रेज़ ने मिर्ज़ा ग़ुलाम अहमद क़ादियानी का चुनाव किया, जो उस वक़्त किसी सरकारी इदारे (संस्थान) में क्लर्क के तौर पर काम कर रहा था। उसके चुनाव की वजह यह थी कि क़ादियानी ख़ानदान शुरू के दिन से मुसलमानों के ख़िलाफ़ रहा है; उन्होंने सिखों के दौर-ए-इक़्तेदार (शासनकाल) में सिखों के साथ मिलकर पंजाब के विभिन्न इलाक़ों में मुसलमान हुर्रियत पसंदों (स्वतंत्रता सेनानियों) के ख़िलाफ़ जंग में हिस्सा लिया और फिर अंग्रेज़ों के दौर में भी मुसलमान मुजाहिदीन के ख़िलाफ़ नबर्द-आज़मा (युद्धरत) हुए। मिर्ज़ा क़ादियानी ने जिहाद की हुर्मत (निषेध) और अंग्रेज़ों की इताअत को लाज़िम क़रार दिया और फिर उसने बतदरीज (धीरे-धीरे) ख़ादिम-ए-इस्लाम, मुबल्लिग़-ए-इस्लाम, मुजद्दिद, इमाम महदी, मसील-ए-ईसा, ज़िल्ली नबी (यानी नबी का साया), बरोज़ी नबी, मुस्तक़िल नबी यहाँ तक कि ख़ुदाई तक का दावा किया। यह सब कुछ एक तयशुदा मन्सूबो (योजना) और ख़तरनाक साज़िश के तहत किया गया। (किताब: माहनामा अल-हक़ अकोड़ा ख़ट्टक, सितंबर पृष्ठ संख्या: 119 नक़ल कर्ता: इस्लामिक ट्यूब प्रो ऐप)

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