عربی اول

مشکوة العربیہ شرح مفتاح العربیہ جلد ١
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علم النحو مع ترکیب
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شرحِ مفید الطالبین
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آسان نحو جلد 1
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آسان نحو جلد 2
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کنز اللغات
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مفید الطالبین
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الدروس النحویہ
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القراءۃ الراشدۃ 1۔2
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सच्चे मौलवी (अल्लाह वाले) की पहचान

सच्चे मौलवी (अल्लाह वाले) की पहचान

अगर किसी ख़ैमे (तंबू) पर लिखा हो 'ख़ैमा-ए-लैला' (लैला का तंबू) लेकिन उसमें झाँक कर देखा तो अंदर कुत्ता बँधा हुआ है, तो उस ख़ैमे की कोई क़द्र नहीं होगी बल्कि लोग मज़ाक उड़ाएंगे। इसी तरह मौलवी वह है जो 'मौला' (अल्लाह) वाला हो। उसके ख़ैमे से मौला की ख़ुशबू मिलनी चाहिए, यानी उसकी सोहबत (संगति) में अल्लाह की मोहब्बत की ख़ुशबू आनी चाहिए। उसकी सोहबत से अल्लाह की मोहब्बत पैदा हो और दुनिया की मोहब्बत दिल से निकले। चुनाँचे जो अल्लाह वाले मौलवी हैं, उनकी ख़ुशबू से एक आलम (पूरी दुनिया) मस्त होता है। ऐसे ही अल्लाह वाले उलेमा (विद्वानों) से दीन फैला है और हमारे तमाम अकाबिर (बुज़ुर्ग) इसकी मिसाल हैं। लेकिन जो मौलवी अल्लाह वालों से मुस्तग़नी (बेपरवाह) रहते हैं और अपने नफ़्स (अहंकार) को नहीं मिटाते, और आवाम (जनता) उनको मौला वाला समझकर उनके पास आती है, लेकिन जब देखती है कि उनके ख़ैमे में तो 'हुब्ब-ए-दुनिया' (दुनिया का लालच) और 'हुब्ब-ए-जाह' (पद-प्रतिष्ठा की चाह) का कुत्ता बँधा हुआ है और 'मौला नदारद' (अल्लाह की याद ग़ायब) है, तो बहुत मायूस होते हैं। आज के दौर में अहल-ए-इल्म (विद्वानों) की बेक़द्री इसी वजह से है, वरना जो उलेमा अहलुल्ला (अल्लाह वालों) की सोहबत याफ़्ता (दीक्षित) हैं, मख़्लूक़ (सृष्टि) आज भी उन पर फ़िदा है। ـــــــــــــــــــــــــــ📝📝ــــــــــــــــــــــــــــ किताब: ख़ज़ाइन-ए-शरीअत व तरीक़त सफ़ा नंबर: 135 मुअल्लिफ़ (लेखक): हज़रत मौलाना शाह हकीम मुहम्मद अख्तर साहब। चयन: इस्लामिक ट्यूब प्रो ऐप ـــــــــــــــــــــــــــ📝📝ــــــــــــــــــــــــــــ

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