عربی سوم

شرح تہذیب
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تسہیل اصول الشاشی
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تقریر کافیہ شرح کافیہ ۱
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تقریر کافیہ شرح کافیہ ۲
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ہادیہ شرح کافیہ
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ہادیہ شرح کافیہ ۲
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معلم الانشاء ۳
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کافیہ
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अल्लाह का ख़ौफ़ और मग़्फ़िरत: सहीह मुस्लिम की एक ईमान अफ़रोज़ हदीस

अल्लाह का ख़ौफ़ और मग़्फ़िरत: सहीह मुस्लिम की एक ईमान अफ़रोज़ हदीस

एक हदीस हज़रत अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अन्हु) से मर्वी (वर्णित) है... फ़रमाते हैं कि एक मर्तबा हुज़ूर अक़्दस (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने पिछली उम्मतों के एक शख़्स का वाक़िया बयान फ़रमाया... कि एक शख़्स था जिसने अपनी जान पर बड़ा ज़ुल्म किया था... बड़े-बड़े गुनाह किए थे... बड़ी ख़राब ज़िंदगी गुज़ारी थी... और जब उसकी मौत का वक़्त आया तो उसने अपने घर वालों से वसीयत करते हुए कहा... कि मैंने अपनी ज़िंदगी को गुनाहों और ग़फ़लतों में गुज़ार दिया है... कोई नेक काम तो किया नहीं है... इसलिए जब मैं मर जाऊँ तो मेरी लाश को जला देना और जो राख बन जाए तो उसको बिल्कुल बारीक पीस लेना... फिर उस राख को मुख़्तलिफ़ जगहों पर तेज़ हवा में उड़ा देना ताकि वो ज़र्रात (कण) दूर-दूर तक चले जाएँ... यह वसीयत मैं इसलिए कर रहा हूँ... कि अल्लाह की क़सम अगर मैं अल्लाह तआला के हाथ आ गया तो मुझे अल्लाह तआला ऐसा अज़ाब (सज़ा) देगा... कि ऐसा अज़ाब दुनिया में किसी और शख़्स को नहीं दिया गया होगा... इसलिए कि मैंने गुनाह ही ऐसे किए हैं कि इस अज़ाब का मुस्तहिक़ (हक़दार) हूँ... जब उस शख़्स का इंतक़ाल हो गया तो उसके घर वालों ने उसकी वसीयत पर अमल करते हुए उसकी लाश को जलाया... फिर उसको पीसा और फिर हवाओं में उड़ा दिया... जिसके नतीजे में उसके ज़र्रात दूर-दूर तक बिखर गए... यह तो उसकी नासमझी की बात थी कि शायद अल्लाह तआला मेरे ज़र्रात को जमा करने पर क़ादिर (समर्थ) नहीं होंगे... चुनांचे अल्लाह तआला ने हवा को हुक्म दिया कि इसके ज़र्रात जमा करो... जब ज़र्रात जमा हो गए तो अल्लाह तआला ने हुक्म दिया... कि इसको दोबारा मुकम्मल इंसान जैसा था वैसा बना दिया जाए... चुनांचे वह दोबारा ज़िंदा होकर अल्लाह तआला के सामने पेश किया गया... अल्लाह तआला ने उससे सवाल किया कि तुमने अपने घर वालों को यह सब अमल करने की वसीयत क्यों की थी? जवाब में उसने कहा "ख़श्यतका या रब्ब" ऐ अल्लाह! आपके डर की वजह से... इसलिए कि मैंने गुनाह बहुत किए थे और इन गुनाहों के नतीजे में मुझे यक़ीन हो गया था कि मैं आपके अज़ाब का मुस्तहिक़ हो गया हूँ... और आपका अज़ाब बड़ा सख़्त है तो मैंने उस अज़ाब के डर से यह वसीयत कर दी थी... अल्लाह तआला फ़रमाएंगे कि मेरे डर की वजह से तुमने यह अमल किया था... तो जाओ मैंने तुम्हें माफ़ कर दिया... यह वाक़िया खुद हुज़ूर अक़्दस (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने बयान फ़रमाया जो सहीह मुस्लिम में सहीह सनद के साथ मौजूद है। (सहीह मुस्लिम, किताबुत तौबा व तन्बीहुल ग़ाफ़िलीन) ـــــــــــــــــــــــــــــــــــــــــــــــــــــــــ किताब: अल्लाह बंदों से कितनी मोहब्बत करते हैं? (सफ़्हा नंबर: 336, 327) मौलिफ़: मौलाना अर्सलान बिन अख़्तर चयन: इस्लामिक ट्यूब प्रो ऐप

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