एक पर्यटक मैक्सिको पहुँचा, जहाँ उसने स्थानीय मछुआरों की उत्तम मछलियों की प्रशंसा की और पूछा: “इन्हें पकड़ने में कितना समय लगता है?” मछुआरों ने जवाब दिया: “ज़्यादा नहीं!” पर्यटक ने आश्चर्य से पूछा: “फिर तुम ज़्यादा शिकार क्यों नहीं करते? ज़्यादा मछलियाँ पकड़ कर ज़्यादा कमा सकते हो!” मछुआरों ने मुस्कुराकर कहा: “हमारा यह शिकार हमारी और हमारे परिवार की ज़रूरतों के लिए काफ़ी है।” पर्यटक ने आगे पूछा: “तो बाक़ी समय में क्या करते हो?” उन्होंने जवाब दिया: “हम देर तक सोते हैं, थोड़ा शिकार करते हैं, अपने बच्चों के साथ खेलते हैं, पत्नियों के साथ खाते हैं, दोस्तों के साथ शाम बिताते हैं और खुश रहते हैं।” पर्यटक जोश से बोला: “मेरे पास हार्वर्ड से मास्टर्स है, मैं तुम्हारी मदद कर सकता हूँ! अगर तुम ज़्यादा शिकार करो, ज़्यादा बेचो, एक बड़ा जहाज़ ख़रीदो, फिर दूसरा, तीसरा, यहाँ तक कि पूरा बेड़ा बना लो, तो एक दिन अपनी फ़ैक्ट्री भी खोल सकते हो! फिर गाँव छोड़कर किसी बड़े शहर जाओ, कारोबार करो, और करोड़ों कमाओ!” मछुआरों ने पूछा: “यह सब करने में कितना समय लगेगा?” पर्यटक: “बीस, पच्चीस साल!” मछुआरे: “और उसके बाद?” पर्यटक खुश होकर बोला: “फिर तुम रिटायर हो सकते हो, किसी तटीय गाँव में जाकर सुकून से ज़िंदगी बिता सकते हो, देर तक सो सकते हो, बच्चों के साथ खेल सकते हो, पत्नियों के साथ खा सकते हो, और शाम दोस्तों के साथ बिता सकते हो।” मछुआरों ने मुस्कुराकर जवाब दिया: “यह तो हम अभी भी कर रहे हैं! तो फिर पच्चीस साल की मशक़्क़त क्यों?” ⸻ ज़िंदगी की दौड़ में हम अक्सर खुशी को एक ऐसी मंज़िल समझते हैं जो मेहनत, दौलत और कामयाबी के बाद मिलेगी, मगर कभी सोचा? क्या खुशी वही नहीं जो अभी हमारे पास है? हम अपनी सेहत, परिवार और आख़िरत (परलोक) को पीछे छोड़कर दिन-रात भाग-दौड़ में लगे रहते हैं, यह सोचकर कि जब हमारे पास सब कुछ होगा, तब हम खुश होंगे। मगर जब ताक़त खत्म हो जाए, जवानी गुज़र जाए, मौत सर पर आ खड़ी हो, तो फिर वह खुशी, जिसके लिए सब कुछ कुर्बान किया, क्या वाक़ई वही खुशी होगी जिसकी हमें तलाश थी? ज़िंदगी की खूबसूरती संतुलन (तवाज़ुन) में है। न बेमक्सद भागना, न रुक कर खो जाना। बस हर लम्हा जीना और वह खुशी महसूस करना, जो हक़ीक़त में हमेशा हमारे करीब ही थी। ____📝📝📝____ 📌 नकल व चस्पां (कॉपी-पेस्ट)۔۔۔ इंतखाब (चयन): इस्लामिक ट्यूब प्रो ऐप۔۔۔
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