عربی چھارم

توضیح الوقایہ شرح اردو شرح وقایہ (کتاب النکاح و الرضاعت)
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تسہیل شرح الجامی
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دلیل الفالحین شرح اردو ریاض الصالحین جلد ١
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دلیل الفالحین شرح اردو ریاض الصالحین جلد ٢
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دلیل الفالحین شرح اردو ریاض الصالحین جلد ٣
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دلیل الفالحین شرح اردو ریاض الصالحین جلد ٤
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دلیل الفالحین شرح اردو ریاض الصالحین جلد ٥
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منثورات من ادب العرب
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تسہیل الحقائق شرح اردو کنز الدقائق جلد ١
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हज़रत उमर (रज़ियल्लाहु अन्हु) की अदालत का एक वाक़िया / औलाद के अधिकार

हज़रत उमर (रज़ियल्लाहु अन्हु) की अदालत का एक वाक़िया / औलाद के अधिकार

हज़रत उमर (रज़ियल्लाहु अन्हु) के दरबार (अदालत) में एक बाप ने अपने बेटे पर दावा (मुक़दमा) किया कि यह मेरे हुक़ूक़ (अधिकार) अदा नहीं करता! हज़रत उमर (रज़ियल्लाहु अन्हु) ने लड़के से दरयाफ़्त (पूछताछ) किया, तो उसने कहा, "ऐ अमीरुल मोमिनीन! क्या बाप ही का सारा हक़ औलाद पर है या औलाद का भी बाप पर कुछ हक़ है?" हज़रत उमर (रज़ियल्लाहु अन्हु) ने फ़रमाया कि औलाद का भी बाप के ज़िम्मे हक़ है। लड़के ने कहा, "मैं उन हुक़ूक़ को सुनना चाहता हूँ।" फ़रमाया, "औलाद का हक़ बाप पर यह है कि औलाद हासिल करने के लिए शरीफ़ औरत तजवीज़ (तलाश/चयन) करे! और जब औलाद पैदा हो तो उसका नाम अच्छा रखे ताकि उसकी बरकत हो! और जब उनके होश दुरुस्त हो जाएँ (समझ आ जाए), तो उनको तहज़ीब (शिष्टता) सिखाए और दीन की तालीम (धार्मिक शिक्षा) दे!" लड़के ने कहा कि, "मेरे बाप ने इन हुक़ूक़ में से एक हक़ भी अदा नहीं किया। और जब मैं पैदा हुआ तो मेरा नाम 'जुआल' (جعل) रखा जिसका अर्थ 'पाखाने का कीड़ा' (गोबरैला) है! और मुझे दीन का एक हरफ़ (अक्षर) भी नहीं सिखाया, मुझे दीनी तालीम से बिल्कुल कोरा (अनजान) रखा।" यह सुनकर हज़रत उमर (रज़ियल्लाहु अन्हु) को बाप पर बहुत ग़ुस्सा आया और उसको बहुत धमकाया (फटकार लगाई) और यह कहकर मुक़दमा ख़ारिज (बंद) कर दिया कि, "जाओ पहले तुम अपने ज़ुल्म की मकाफ़ात (भरपाई/प्रायश्चित) करो, उसके बाद लड़के के ज़ुल्म की फ़रयाद करना!" हज़रत उमर (रज़ियल्लाहु अन्हु) ने मुक़दमा ख़ारिज कर दिया और बाप से फ़रमाया कि, "तूने इससे ज़्यादा हक़-तल्फ़ी (अधिकारों का हनन) की है, जाओ अपनी औलाद के साथ ऐसा बर्ताव न किया करो।" (अल-फ़ैज़ुल हसन पृ. 102, हुक़ूक़ुल बैत पृ. 47) (किताब: माहनामा अनवार-ए-मदीना लाहौर, अक्टूबर नक़ल कर्ता: इस्लामिक ट्यूब प्रो ऐप)

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