عربی چھارم

کنز الدقائق بشری جلد 1
کنز الدقائق بشری جلد 1
کنز الدقائق بشری جلد 2
کنز الدقائق بشری جلد 2
کنز الدقائق بشری جلد 3
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مفتاح البلاغہ شرح اردو دروس البلاغہ
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ریاض الصالحین
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قصص النبیین مترجم جلد 1
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قصص النبیین مترجم جلد 2
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قصص النبیین مترجم جلد 3
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قصص النبیین مترجم جلد 4
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छोटे बच्चों से झूठ बोलना – हदीस की रोशनी में एक सबक़

छोटे बच्चों से झूठ बोलना – हदीस की रोशनी में एक सबक़

नबी-ए-अकरम (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने छोटे बच्चों के साथ भी झूठ बोलने से मना फ़रमाया है। चुनांचे, हज़रत अब्दुल्लाह बिन आमिर (रज़ियल्लाहु अन्हु) फ़रमाते हैं कि आनहज़रत (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) हमारे मकान में तशरीफ़ फ़रमा थे, मेरी वालिदा (माँ) ने (मेरी तरफ़ बंद मुट्ठी बढ़ाकर) कहा: "यहाँ आओ! मैं तुम्हें दूँगी" (जैसे माएँ बच्चे को पास बुलाने के लिए ऐसा करती हैं)। तो आनहज़रत (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने वालिदा से इर्शाद फ़रमाया: "तुम्हारा इसे क्या देने का इरादा था?" वालिदा ने जवाब दिया कि, "मैं इसे खजूर देना चाहती थी।" तो आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने इर्शाद फ़रमाया कि: أَمَا إِنَّكِ لَوْ لَمْ تُعْطِهِ شَيْئًا كُتِبَتْ عَلَيْكِ كَذِبَةٌ. (अत-तरग़ीब वत-तरहीब (3/370) "अगर तुम इसे कोई चीज़ न देतीं, तो तुम्हारे नामा-ए-अमाल (कर्मों के खाते) में एक झूठ लिखा जाता।" इस हदीस से मालूम हुआ कि बहुत सी ऐसी बातें जिन्हें मुआशरे (समाज) में झूठ नहीं समझा जाता है, उन पर भी झूठ का गुनाह हो सकता है। बच्चों को झूठी तसल्लियाँ देना और झूठे वादे करना आम तौर पर हर जगह रायज (प्रचलित) है, और इसे झूठ समझा ही नहीं जाता। हालांकि दर्ज-ए-बाला (ऊपर दिए गए) इर्शाद-ए-नब्वी के मुताबिक़ यह भी झूठ में दाख़िल (शामिल) है, जिससे बचने का एहतिमाम (प्रयास) करना चाहिए। (रहमान के ख़ास बंदे, पृष्ठ: 336)

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