عربی چھارم

توضیح الوقایہ شرح اردو شرح وقایہ (کتاب النکاح و الرضاعت)
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تسہیل شرح الجامی
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دلیل الفالحین شرح اردو ریاض الصالحین جلد ١
دلیل الفالحین شرح اردو ریاض الصالحین جلد ١
دلیل الفالحین شرح اردو ریاض الصالحین جلد ٢
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دلیل الفالحین شرح اردو ریاض الصالحین جلد ٣
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دلیل الفالحین شرح اردو ریاض الصالحین جلد ٤
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دلیل الفالحین شرح اردو ریاض الصالحین جلد ٥
دلیل الفالحین شرح اردو ریاض الصالحین جلد ٥
منثورات من ادب العرب
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تسہیل الحقائق شرح اردو کنز الدقائق جلد ١
تسہیل الحقائق شرح اردو کنز الدقائق جلد ١

बहिश्ती जेवर और तालीम-उद-दीन के कुछ स्थानों का सुधार (संशोधन)

बहिश्ती जेवर और तालीम-उद-दीन के कुछ स्थानों का सुधार (संशोधन)

बहिश्ती जेवर और तालीम-उद-दीन के कुछ स्थानों का सुधार: (१) بہیستی زیور (बहिश्ती जेवर) में इशा के बाद चार सुन्नतें लिख दी गई हैं, सही यह है कि दो सुन्नत हैं और दो नफ़्ल। (२) بہیستی زیور (बहिश्ती जेवर) में अय्याम-ए-बीज़ (चाँद की तारीखों के रोज़े) १२, १३, १४ तारीखों को लिख दिया गया है, सही १३, १४, १५ हैं। (३) तालीम-उद-दीन और बहिश्ती जेवर में तीजे, चालिसवें आदि के बिदअत (नवाचार) होने के ज़िक्र में यह शब्द लिखा गया है "ज़रूरी समझकर करना"। इससे यह संदेह हो सकता है कि शायद ग़ैर-ज़रूरी समझकर करना जाइज़ हो। यह क़ैद वाक़ई (वर्णनात्मक) थी, एहतराज़ी (प्रतिबंधात्मक) नहीं थी। हुक्म यह है कि चाहे किसी भी तरह से करे, वह बिदअत ही है। (४) तालीम-उद-दीन में क़ब्रों पर चिराग जलाने के बारे में यह शब्द लिखा गया है: "कसरत से चिराग जलाना"। इसमें भी तीसरे स्थान की तरह ही समझना चाहिए, हुक्म यह है कि एक चिराग रखना भी बिदअत है। अहबाब (मित्रों) से दुआ की गुज़ारिश है कि हक़ तआला (अल्लाह) मेरी ख़ता (अनजानी भूल) और अमद (जानबूझकर की गई ग़लती) को माफ़ फ़रमाए और मेरी तक़रीरों व तहरीरों (भाषणों और लेखों) को गुमराह-कुन (भटकाने वाला) न बनाए। _____________________________________ (अशरफ़ुस सवानिह: ३/१३५, बवादिरुन नवादिर: ४२८)

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