عربی چھارم

کنز الدقائق بشری جلد 1
کنز الدقائق بشری جلد 1
کنز الدقائق بشری جلد 2
کنز الدقائق بشری جلد 2
کنز الدقائق بشری جلد 3
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مفتاح البلاغہ شرح اردو دروس البلاغہ
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ریاض الصالحین
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قصص النبیین مترجم جلد 1
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قصص النبیین مترجم جلد 2
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قصص النبیین مترجم جلد 3
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قصص النبیین مترجم جلد 4
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कारोबारी लाइन में मर्द-ओ-ज़न का इख़्तिलात

कारोबारी लाइन में मर्द-ओ-ज़न का इख़्तिलात

मलफ़ूज़ात : हज़रत मौलाना मोहम्मद हकीम अख्तर साहब रहमतुल्लाह अलैह - व्यापारिक (کاروباری) लाइन में भी मर्द और औरत का इख़्तिलात (मेल-जोल) उरूज (चरम) पर है, देखिए! अव्वल (पहले) तो ऐसी रोज़ी तलाश करे जिसमें गुनाह का अंदेशा न हो, औरतों से साबक़ा (सामना) न हो, चाहे रोज़ी कम हो, पत्थर बांधकर भी अगर ख़ुदा मिल जाए तो सौदा महंगा नहीं है, एक तो यह है। लेकिन अगर कोई और ज़रिया नहीं है और तनख़्वाह इतनी कम है कि उसमें गुज़ारा नहीं है तो बर्दाश्त कर ले लेकिन रोज़ी तलाश करता रहे, रोज़ी के बहुत से ज़राए (साधन) हैं, जिसमें औरतों का कोई गुज़र वहां नहीं है। दोस्तों! पेट पर पत्थर बांध लो, लेकिन अल्लाह को राज़ी रखो, इन्शाअल्लाह तआला आपकी चटनी-रोटी में अल्लाह तआला बिरयानी का मज़ा अता कर देगा, आपकी थोड़ी सी रोज़ी में आपको बादशाहों से ज़्यादा रश्क-ए-हफ़्त इक़्लीम सुल्तनत (सात अक़्लीमों की सल्तनत के राजाओं द्वारा ईर्ष्या करने योग्य) का मज़ा क़ल्ब (दिल) में अता कर देगा। शाहों के सरों में ताज-ए-गिरां से दर्द सा अक्सर रहता है और अहल-ए-सफ़ा के सीनों में इक नूर का दरिया बहता है ऑरतें रखने से सेलिंग (Selling), डीलिंग (Dealing) और रोलिंग (Rolling) अगर ज़्यादा होती है तो अपनी इस लोडिंग (Loading) और बोर्डिंग (Boarding) से बचो, सहाबा ने पेट पर पत्थर बांधा लेकिन अल्लाह को नाराज़ नहीं किया। हकीमुल उम्मत थानवी रहमतुल्लाह अलैह के ख़लीफ़ा हज़रत शाह वसीउल्लाह साहब रहमतुल्लाह अलैह की घी की दुकान थी, घी लेने के लिए बीस हज़ार का गाहक आया था, तराज़ू में अभी रखा ही था कि अज़ान की आवाज़ आ गई, बस! उसे वहीं छोड़ दिया और बीस हज़ार वापस कर दिए और कहा कि नमाज़ पढ़ के आऊंगा फिर घी दूंगा, अगर आपको मेरा इंतिज़ार मुश्किल है तो किसी और दुकान से आप ख़रीद लीजिए। उस काफ़िर ख़रीदार ने कहा: जो ख़ुदा से इतना डरता है हम उसी से घी लेंगे ताकि मेरा घी और उसका वज़न सही हो, लिहाज़ा इतनी बिक्री हो गई कि सारे इलाहाबाद में उनका घी का कारोबार सबसे आगे बढ़ गया। इसलिए अच्छी तरह समझ लो, मोमिन की शान यह है कि अगर दस हज़ार कमाता है तो पांच ही हज़ार में गुज़ारा कर लो लेकिन लड़कियों को पी.ए. (P.A.) न रखो वरना यह ईमान को पी जाएंगी। जो लोग लड़कियों को पी.ए. रखते हैं वे बे-पिए ही पिए रहते हैं। लिहाज़ा इनको पी.ए. न रखो, चाहे बिक्री यानी Sale कम हो जाए, चाहे कुछ हो जाए। मोमिन वह है जो जान की बाज़ी लगा दे। गुनाह में लाख फ़ायदा हो मगर फ़ायदे को मत देखो, अल्लाह को नाराज़ करके किसी को फ़ायदा नहीं हो सकता। अपने रब की नाराज़गी मत ख़रीदो, वरना उनकी लाठी में आवाज़ नहीं है। रात को ख़ैरियत से लेटे और सुबह गर्दन में कैंसर हो गया। लिहाज़ा अल्लाह तआला के ख़ौफ़ से निगाह बचाओ, दिल बचाओ और जिस्म बचाओ, इन्शाअल्लाह! हम और आप वलीउल्लाह बनकर मरेंगे। हज़रात सहाबा किराम की तरह पेट में पत्थर बांध लीजिए। एक ग़ज़वा के मौक़े पर सहाबा ने कहा: पेट पर पत्थर है। हुज़ूर अलैहिस्सलाम ने फ़रमाया कि मेरे पेट पर दो पत्थर बंधे हुए हैं। हमारे यहां तो कोई फ़ाक़ा नहीं हो रहा है। इन्शाअल्लाह इस थोड़ी रोज़ी में जो अल्लाह की ख़ुशी की राहों से नसीब होगी, आप हर वक़्त ख़ुश रहेंगे और अगर आपने नाफ़रमानी की राहों से माल बढ़ा लिया और हराम ख़ुशियो से दिल को ख़ुश कर लिया तो मैं सच कहता हूँ कभी चैन का ख़्वाब भी नहीं नसीब होगा, इस पर जो मर्ज़ और जो अज़ाब भी आ जाए कम है। जो शख़्स किसी लड़की या लड़के के साथ रहेगा, एक न एक दिन मुंह काला होगा इसलिए ऐसा भागो जैसे सांप से भागते हो चाहे कुछ भी मस्लहत हो, सब मसाला पीस के रख लो। मस्लहत-वस्लहत मत देखो कि साहब! यह लड़का ग़रीब है, यतीम है, इसको मकान से निकाल दूंगा तो यह भूखा मर जाएगा, आप उसके रब नहीं हैं, आप उसके राज़ीक़ (रिज़्क़ देने वाले) नहीं हैं, आप उसके पालने के ज़िम्मेदार नहीं हैं, अपने ईमान की हिफ़ाज़त करो। अगर तुम्हारे दिल में गंदे ख़यालात आ रहे हैं और ख़तरा है कि इससे गुनाह हो जाएगा, तो उसकी कुछ इमदाद (मदद) की जा सकती है मगर उसको काम से निकाल दो, अल्लाह पर नज़र रखो। अब एक लड़की आ जाए और वह यतीम भी हो और उम्र पंद्रह साल भी है और रोने लगे कि साहब! मुझे ख़ादिमा रख लीजिए, ख़ादिमा रखना आपको जाइज़ नहीं है, आप उसकी शादी करा दीजिए, पैसा निकालिए, जेब ढीली कीजिए, जेब की ज़िप से रक़म निकालिए, चेन उतारिए और उसको चैन दीजिए, उसके चैन के लिए अपना दीनी चैन बर्बाद मत कीजिए। अरे बहुत से तरीक़े हैं मशवरा तो कर लो, लेकिन ऐसी जुर्रत मत करो। ____📝📝📝____ किताब: माहनामा अल-अबरार कराची (जून)। सफ़ा नंबर: 18 ता 20। चयन : इस्लामिक ट्यूब प्रो ऐप।

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