عربی ششم

جلالین کلاں
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مظاہر حق جلد 1
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مظاہر حق جلد 2
مظاہر حق جلد 2
مظاہر حق جلد 3
مظاہر حق جلد 3
مظاہر حق جلد 4
مظاہر حق جلد 4
مرقاۃ المفاتیح شرح مشکوٰۃ المصابیح جلد 1
مرقاۃ المفاتیح شرح مشکوٰۃ المصابیح جلد 1
مرقاۃ المفاتیح شرح مشکوٰۃ المصابیح جلد 2
مرقاۃ المفاتیح شرح مشکوٰۃ المصابیح جلد 2
مرقاۃ المفاتیح شرح مشکوٰۃ المصابیح جلد 3
مرقاۃ المفاتیح شرح مشکوٰۃ المصابیح جلد 3
مرقاۃ المفاتیح شرح مشکوٰۃ المصابیح جلد 4
مرقاۃ المفاتیح شرح مشکوٰۃ المصابیح جلد 4

बेटे का इस्लाम कबूल करना: एक फ्रांसीसी मां की हैरान कर देने वाली ख्वाहिश

बेटे का इस्लाम कबूल करना: एक फ्रांसीसी मां की हैरान कर देने वाली ख्वाहिश

एक फ्रांसीसी महिला अपने चौदह वर्षीय बेटे को लेकर फ्रांस के एक इस्लामिक सेंटर में आई ताकि उसका बेटा मुसलमान हो जाए। वे दोनों इस्लामिक सेंटर पहुँचे اور इस्लामिक सेंटर के डायरेक्टर के ऑफिस में जाकर बच्चे ने मुलाकात की। बच्चे ने कहा, "मेरी अम्मी चाहती हैं कि मैं मुसलमान हो जाऊँ।" इस्लामिक सेंटर के डायरेक्टर ने बच्चे से पूछा, "क्या तुम इस्लाम कबूल करना चाहते हो...?" बच्चे ने जवाब दिया, "मैंने अभी तक इस पर गौर नहीं किया है, लेकिन मेरी मां की ख्वाहिश है कि मैं इस्लाम कबूल कर लूं।" डायरेक्टर को बच्चे के इस जवाब पर बड़ी हैरानी हुई। उसने बच्चे से पूछा, "क्या तुम्हारी मां मुस्लिम हैं...?" बच्चे ने कहा, "नहीं, मेरी मां मुस्लिम नहीं हैं और न ही मुझे मालूम है कि वह मुझे इस्लाम कबूल करने के लिए क्यों कह रही हैं।" डायरेक्टर ने पूछा, "तुम्हारी मां कहाँ हैं...?" बच्चे ने कहा, "वह इस्लामिक सेंटर के बाहर खड़ी हैं।" डायरेक्टर ने कहा, "अपनी मां को बुला लाओ, ताकि मैं उनसे बातचीत करके स्थिति को जान सकूं।" बच्चा अपनी मां को लेकर डायरेक्टर के पास आया। डायरेक्टर ने मां से पूछा, "क्या यह बात सच है कि आप मुसलमान नहीं हैं और चाहती हैं कि आपका बेटा मुसलमान हो जाए...?" मां ने कहा, "यह बात बिल्कुल ठीक है।" डायरेक्टर को इस जवाब पर बड़ी हैरानी हुई, उसने मां से पूछा, "आप क्यों चाहती हैं कि आपका बेटा इस्लाम कबूल करे?" मां ने जो जवाब दिया वह हैरान कर देने वाला था। मां ने बताया, "मैं पेरिस के जिस फ्लैट में रहती हूँ, मेरे फ्लैट के ठीक सामने एक मुस्लिम परिवार का फ्लैट है। उनके दो बच्चे यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करते हैं। सुबह और शाम जब भी ये दोनों बच्चे घर से निकलते हैं या घर में आते हैं, वे अपनी मां के माथे को चूमते हैं और उनके हाथों को बोसा देते हैं (चूमते हैं)। वे बड़े सम्मान और अदब के साथ अपनी मां के साथ पेश आते हैं, मानो वह मां किसी देश की प्रधानमंत्री हों। जब से मैंने यह नज़ारा देखा है, मेरी दिली तमन्ना हो गई है कि मेरा बेटा भी मुसलमान हो जाए। वरना मुझे डर है कि जब मैं बूढ़ी हो जाऊँगी, तो वह कहीं मुझे ओल्ड एज होम (वृद्धाश्रम) में न रख दे। मैं चाहती हूँ कि वह मेरे साथ वैसा ही व्यवहार करे, जैसा ये मुस्लिम बच्चे अपनी मां के साथ करते हैं।" (मन्क़ूल — चयन: इस्लामिक ट्यूब प्रो ऐप)

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