تحفة القاری شرح صحیح البخاری جلد ٤
कवर देखें

تحفة القاری شرح صحیح البخاری جلد ٤

इस पुस्तक को एक क्लिक के साथ देखें। ऑनलाइन पढ़ें या ऑफलाइन पढ़ने के लिए डाउनलोड करें।

कहानी के दो पहलू। 🎭

कहानी के दो पहलू। 🎭

1956 में अमेरिका में एक समुद्री जहाज़ तेल लेकर जा रहा था। यह जहाज़ अचानक अपने रूट से हटा, समुद्र में मौजूद एक चट्टान से टकराया और पाश-पाश (चकनाचूर) हो गया। हादसे के बाद जहाज़ के कप्तान को गिरफ़्तार कर लिया गया और उससे हादसे की वजह पूछी गई। कप्तान ने बताया कि वह जहाज़ के डेक पर खड़ा था। आसमान बिल्कुल साफ़ था। अचानक आसमान से जलप्रपात (آبشار) की तरह डेक पर पानी गिरा और पानी के साथ ही आसमान से एक मोटी-ताज़ी भैंस नीचे गिरी। भैंस के गिरने से जहाज़ का संतुलन (توازن) बिगड़ा और यह चट्टान से टकरा गया। यह एक अजीब तरह का बहाना था और कोई भी सामान्य (नारमल) शख़्स इस कहानी पर यक़ीन करने के लिए तैयार नहीं था। आप भी इस पर यक़ीन नहीं करेंगे क्योंकि अगर आसमान बिल्कुल साफ़ हो, आसमान से अचानक पानी की बौछार गिरे और थोड़ी देर बाद एक धमाके के साथ आसमान से एक भैंस नीचे गिर जाए, तो इस पर कौन यक़ीन करेगा। कप्तान की बात पर भी किसी ने यक़ीन नहीं किया था। ऑयल कंपनी ने उसे झूठा क़रार दे दिया। पुलिस ने उसे मुजरिम घोषित (ڈکلیئر) कर दिया और आख़िर में मनोवैज्ञानिकों (نفسیات دانوں) ने भी उसे पागल और झूठा क़रार दे दिया। कप्तान को पागलखाने में दाख़िल कर दिया गया, वह वहाँ पच्चीस साल तक क़ैद रहा और इस क़ैद के दौरान वह हक़ीक़तन (सचमुच) पागल हो गया। यह इस कहानी का एक पहलू था और इस पहलू को देखने, सुनने और पढ़ने वाले इस कप्तान को पागल या झूठा कहेंगे। अब आप इस कहानी का दूसरा एंगल मुलाहिज़ा कीजिए (देखिए) और इस एंगल के आख़िर में आपको यह कप्तान दुनिया का सबसे मजलूम (पीड़ित) शख़्स दिखाई देगा। इस वाक़िए के पच्चीस साल बाद एयरफ़ोर्स के एक रिटायर्ड अफ़सर ने अपनी यादों पर आधारित एक किताब लिखी, इस किताब में उसने ख़ुलासा (انکشاف) किया कि 1956 में एक पहाड़ी जंगल में आग लग गई थी और उसे आग बुझाने का टास्क दिया गया था। उसने एक जहाज़ के साथ पानी का एक बहुत बड़ा टैंक बाँधा था, वह इस टैंक को झील में डुबोकर भरता, जंगल के ऊपर जाता और पानी आग पर गिरा देता और टैंक भरने के लिए दोबारा झील पर चला जाता। वह एक बार पानी का टैंक लेकर जा रहा था कि उसे अचानक टैंक के अंदर उछल-कूद महसूस हुई। उसे महसूस हुआ कि टैंक के अंदर कोई ज़िंदा चीज़ चली गई है और अगर उसने टैंक को तुरंत नहीं खोला तो उस चीज़ की उछल-कूद से उसका जहाज़ गिर जाएगा। उसने फ़ौरन टैंक खोल दिया, टैंक से पानी की बौछार नीचे गिरी और उसके साथ ही मोटी-ताज़ी भैंस भी नीचे गिर गई। यह पानी और भैंस नीचे समुद्री जहाज़ के डेक पर गिरे। आप अब कहानी के इस पहलू को पहले एंगल से जोड़कर देखिए, आपको सारा सीन (سینیاریو) बदलता हुआ दिखाई देगा। लिहाज़ा याद रखिए, आप जब तक दूसरे पक्ष (فریق) का रुख़ (موقف) न सुन लें, उस वक़्त तक आप किसी शख़्स की कहानी या दलील पर यक़ीन नहीं करेंगे, क्योंकि जब तक मुल्ज़िम और मुद्दई (शिकायतकर्ता) का पक्ष सामने नहीं आता, सूरत-ए-हाल साफ़ नहीं होती। हक़ीक़त क्या होती है? हक़ीक़त कहानी की तरह होती है और आप जब तक कहानी का दूसरा पहलू या उसका दूसरा एंगल नहीं देख लेते, उस वक़्त तक कहानी मुकम्मल नहीं होती, उस वक़्त तक सच्चाई आपके सामने नहीं आती। लिहाज़ा ज़िंदगी में जब भी आप ऐसी सूरत-ए-हाल का शिकार हों, आप हमेशा दोनों पक्षों को सुनने के बाद ही फ़ैसला करें।

सबसे हालिया

Naats