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कारुन नहीं जानता था कि हमारी जेब में मौजूद एटीएम (ATM) कार्ड उसकी चाबियों की जगह ले लेगा, जिसकी चाबियों को ताकतवर मर्द भी नहीं उठा पाते थे...!! किसरा (फ़ारस का राजा) नहीं जानता था कि हमारे ड्राइंग रूम का सोफ़ा उसके तख़्त (सिंहासन) से ज़्यादा आरामदायक है...!! क़ैसर (सीज़र), जिसके ग़ुलाम उसके सिर के ऊपर शुतुरमुर्ग के पंखों से हवा करते थे, उसने कभी हमारे घरों में मौजूद एयर कंडीशनर (AC) नहीं देखे...!! हरक़ुल, जो गर्व से पानी की सुराही से पानी पीता था और जिसके आस-पास के लोग उसकी ठंडक पर ईर्ष्या करते थे, उसने कभी हमारे घरों में मौजूद वाटर कूलर से पानी नहीं पिया...!! ख़लीफ़ा अल-मंसूर, जिसके ग़ुलाम गर्म और ठंडे पानी को मिलाते थे ताकि वह गर्व से स्नान कर सके, उसने कभी जाकूज़ी (Jacuzzi) में स्नान नहीं किया...!! हज का सफ़र जो ऊंटों की पीठ पर महीनों लेता था, हमारे लिए हवाई जहाजों में कुछ घंटों का सफ़र है...!! हम एक ऐसी ज़िंदगी जी रहे हैं जो राजाओं ने कभी नहीं जी, बल्कि ख़्वाब में भी नहीं देखी, और फिर भी हम में से बहुत से लोग अपनी क़िस्मत को रोते हैं। जब आपकी आँखें वसीअ (बड़ी/लालची) हो जाती हैं, तो आपका दिल तंग (छोटा) हो जाता है। अल्हम्दुलिल्लाह (अल्लाह का शुक्र है) कह दें, वह अल्लाह हमारे लिए काफ़ी है। _____________________________________ मनकूल (साभार)। चयन: इस्लामिक ट्यूब प्रो ऐप
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