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हज़रत शाह अब्दुल रहीम साहब सहारनपुरी, जो बड़े साहिब-ए-कश्फ़-ओ-करामात (आध्यात्मिक रहस्य और चमत्कार वाले) थे, उनका एक वाक़िया बहुत मशहूर है कि पंजाब से हकीम नूरुद्दीन इलाज के सिलसिले में हज़रत शाह साहब के पास आए... हज़रत ने उनसे फ़रमाया कि "हकीम साहब! पंजाब में कोई जगह क़ादियान है, वहाँ से किसी ने नबुव्वत (पैगंबरी) का दावा तो नहीं किया?" हकीम साहब ने कहा कि "किसी ने नहीं किया"... हज़रत शाह साहब ने फ़रमाया कि "वहाँ से एक शख़्स नबुव्वत का दावा करेगा और लौह-ए-महफ़ूज़ में आपको उसका मुसाहिब (साथी) लिखा गया है, आपके अंदर एक मर्ज़ (बीमारी) है (बहस करने और उलझने की यह बीमारी आपको वहाँ ले जाएगी और आप मुब्तला/ग्रसित हो जाएँगे। हम तो उस वक़्त नहीं होंगे, मगर आपको इज़्न-ए-इलाही/अल्लाह की अनुमति से) पहले से मुत्तला (सूचित) किए देते हैं"... चुनाँचे ऐसा ही हुआ कि मिर्ज़ा ग़ुलाम अहमद क़ादियानी ने नबुव्वत का दावा किया और ये हकीम साहब उससे मुनाज़रा (बहस) करने के लिए गए और उसके दाम (जाल) में फँस गए और उस पर ईमान ले आए और फिर उसके ख़लीफ़ा-ए-अव्वल (पहले ख़लीफ़ा) हुए... नऊज़ु बिलाह)। (आप बीती अज़ शैख़ुल हदीस हज़रत मौलाना ज़करिया रहमतुल्लाह अलैह) ____📝📝📝____ किताब : क़ाबिलियत और मक़बूलियत। सफ़ा नंबर : 102। लेखक : मौलाना मोहम्मद इसहक़ मुल्तानी। चयन : इस्लामिक ट्यूब प्रो ऐप।
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admin | 30 October, 2026