New Naat | Teri Sirat Pe Zamane Ko Chalana Hoga, Phir Se Insaan Ko Insaan Banana Hoga By Hassan afzaal Siddiqui

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नबुव्वत की हक़ीक़त: मौलाना शम्सुल हक़ अफ़ग़ानी का लाजवाब जवाब

नबुव्वत की हक़ीक़त: मौलाना शम्सुल हक़ अफ़ग़ानी का लाजवाब जवाब

मौलाना शम्सुल हक़ अफ़ग़ानी (रहमतुल्लाह अलैह) से एक क़ादियानी जज ने पूछा: "नबुव्वत (पैगंबरी) क्या चीज़ है?" मौलाना शम्सुल हक़ अफ़ग़ानी फ़रमाने लगे: "नबुव्वत एक आला (सर्वोच्च) मन्सब (पद) है, अल्लाह जल्ल शानुहू जिसे चाहे अता फ़रमा देता है।" क़ादियानी बोला: "जब इतना अच्छा मन्सब है तो इसे आम (सबके लिए खुला) करना चाहिए।" मौलाना शम्सुल हक़ अफ़ग़ानी ने १०० (सौ) रुपये का नोट निकाल कर फ़रमाया: "यह नोट कैसा है??" उसी ज़माने में सौ रुपये का नोट बहुत बड़ा नोट माना जाता था। क़ादियानी बोला: "यह तो आला चीज़ है।" मौलाना शम्सुल हक़ अफ़ग़ानी ने फ़रमाया: "जब इतनी आला चीज़ है तो इसे आम करना चाहिए। एक मुहर (स्टैम्प) मैं अपनी तरफ से बनाऊँगा और नक़ली नोट तैयार करके आम करता रहूँगा।" क़ादियानी जज बोला: "यह काम अगर आपने किया तो आप मुजरिम (अपराधी) होंगे और सज़ा के मुस्तहिक़ (हक़दार) होंगे। इस काम की अथॉरिटी (अधिकार) सिर्फ हुकूमत (सरकार) के पास है, किसी और के पास नहीं।" मौलाना शम्सुल हक़ अफ़ग़ानी ने फ़रमाया: "ٹھیک ہے۔ (बिलकुल सही) अब यह समझो कि नबुव्वत भले ही एक आला मन्सब है, मगर इसकी अथॉरिटी सिर्फ अल्लाह तआला के पास है। जिसको वह चाहे नबी बना देता है। अब आप लोगों ने अपना नक़ली नबी बनाया है, इसलिए आप लोग अल्लाह पाक के नज़दीक मुजरिम हैं।" इस तहरीर (लेख) को हर साहिबे-ईमान (ईमान वाला) ज़्यादा से ज़्यादा शेयर करे... यह मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व आलिही वसल्लम) से मोहब्बत का एक छोटा सा इज़हार होगा। _____________________________________ मनकूल (साभार)। चयन: इस्लामिक ट्यूब प्रो ऐप

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