"क्या तुम्हें ग़ैरत (शर्म) नहीं आती?

लोग अल्लाह की तरफ तु...
Ummah Post
9 June, 2025

"क्या तुम्हें ग़ैरत (शर्म) नहीं आती?

लोग अल्लाह की तरफ तुमसे आगे निकल गए हैं, और तुम हो कि अभी तक अपनी शहवतों (वासनाओं/इच्छाओं) के पीछे घिसट रहे हो!

ऐ मिस्कीन (बेचारे), ज़रा होश के नाख़ून लो (होश में आओ)!

(अरबी से अनुवाद)"

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इतिहास की सबसे शक्तिशाली माफ़ी (हज़रत अबू ज़र और हज़रत बिलाल का वाक़िया)
लेख

इतिहास की सबसे शक्तिशाली माफ़ी (हज़रत अबू ज़र और हज़रत बिलाल का वाक़िया)

जब हज़रत अबू ज़र (रज़ियल्लाहु अन्हु) ने हज़रत बिलाल (रज़ियल्लाहु अन्हु) को कहा... "ऐ काली-कलूटी माँ के बेटे! अब तू भी मेरी ग़लतियाँ निकालेगा...?" बिलाल यह सुनकर ग़ुस्से और अफ़सोस से बेक़रार होकर यह कहते हुए उठे, "ख़ुदा की क़सम! मैं इसे ज़रूर ब-ज़रूर अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के...