और मंज़र भी मुहैय्या (उपलब्ध) थे बसारत (दृष्टि) को मगर...
मेरी आँखों ने फ़क़त (सर्फ़) आपका रास्ता देखा। 🌸
सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम (अल्लाह की रहमत और सलामती हो उन पर और उनकी आल पर)। 🤍
और मंज़र भी मुहैय्या (उपलब्ध) थे बसारत (दृष्टि) को मगर...
मेरी आँखों ने फ़क़त (सर्फ़) आपका रास्ता देखा। 🌸
सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम (अल्लाह की रहमत और सलामती हो उन पर और उनकी आल पर)। 🤍