मैसेंजरों में घुस के न ईमां ख़राब कर,
शैतां की राह छोड़ के का...
Ummah Post
11 October, 2024

मैसेंजरों में घुस के न ईमां ख़राब कर,

शैतां की राह छोड़ के कार-ए-सवाब कर।

"क्या आप आलमा हो" की रट छोड़ दीजिए,

बेकार ख़्वाहिशात से अब इज्तिनाब कर।

यह मसनूई (बनावटी) अल्फ़ाज़ के लिखने को छोड़ कर,

तौबा के फ़ज़ाइल लिए ख़ुद से ख़िताब कर।

कब तक हराम काम को करते रहोगे तुम,

पैदा ज़ईफ़ (कमज़ोर) दिल में नया इंक़िलाब कर।

क्या मक़सद-ए-हयात फ़क़त जिंस-ए-मुख़ालिफ़?

भटके दिल व दिमाग़ का ख़ुद एहतिसाब (आत्मनिरीक्षण) कर।

किस सिम्त (दिशा) रवाना है सवारी-ए-ज़िंदगी,

ख़ुद अपने आप से यह सवाल व जवाब कर।

- हुदहुद

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