ग़ज़ल अज़ मुफ़्ती मोहम्मद तक़ी उस्मानी साहब:
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Ummah Post
24 March, 2025

ग़ज़ल अज़ मुफ़्ती मोहम्मद तक़ी उस्मानी साहब:

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वो मौत क्या, जो न दे तेरी दीद का तोहफ़ा

जो तेरी धुुन में न गुज़रे वो ज़िंदगी क्या है?

न तेरा ज़िक्र हो जिन में वो मजलिसें बर्बाद

हो तेरी याद से ख़ाली तो ख़ामोशी क्या है?

जो इल्म मुझ को न पहुंचाए तेरी चौखट तक

न मुझ को तेरा पता दे जो आगाही क्या है

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किताब: गोशा-ए-तन्हाई (शेरी मजमुआ)

(सफ़ा नंबर 115)

तालीफ़: हज़रत मुफ़्ती मोहम्मद तक़ी उस्मानी साहब

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लेख

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