दिल्ली के ऐतिहासिक धरना स्थल जंतर-मंतर से दिल्ली पुलिस ने कई स्तरों की बैरिकेडिंग हटा ली है और सड़क को सामान्य यातायात के लिए खोल दिया है। 1993 से प्रमुख धरना स्थल रहे इस इलाके की तस्वीर 33 साल बाद पूरी तरह बदल गई है। अब आम नागरिक और वाहन चालक यहां से बिना रोक-टोक आवाजाही कर सकेंगे।
पहले कैसा था माहौल?
सुरक्षा के लिहाज से जंतर-मंतर रोड के दोनों ओर कई स्तरों पर मजबूत बैरिकेडिंग रहती थी।
भारी संख्या में पुलिस बल, पैरामिलिट्री फोर्स, क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) और एंटी-राइट वाहन तैनात रहते थे।
इन पाबंदियों से यातायात लंबे समय से बुरी तरह प्रभावित रहता था।
धरना स्थलों की सूची से क्यों हटा जंतर-मंतर?
अक्टूबर में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और अन्य संगठनों के प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ था। इसके बाद गृह मंत्रालय द्वारा गठित समिति की सिफारिशों पर दिल्ली पुलिस ने 11 अक्टूबर को आदेश जारी कर जंतर-मंतर को आधिकारिक धरना स्थलों की सूची से बाहर कर दिया।
किन्हें मिलेगी राहत?
जंतर-मंतर रोड बंद रहने से संसद मार्ग, कनॉट प्लेस (आउटर और इनर सर्कल), अशोक रोड और टॉल्स्टॉय मार्ग पर भारी ट्रैफिक दबाव रहता था।
पीक आवर्स में चंद मिनटों का सफर तय करने में 20 से 30 मिनट लग जाते थे।
अब यह सीधा संपर्क मार्ग चालू होने से कनॉट प्लेस और आसपास के दफ्तरों में आने-जाने वालों का सफर आसान और तेज होगा।
ट्रैफिक अधिकारियों के अनुसार, सुचारू आवाजाही के लिए जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
आगे क्या?
धरना स्थल की सूची से हटाए जाने के बाद जंतर-मंतर पर अब प्रदर्शन आयोजित नहीं हो सकेंगे। प्रदर्शन के लिए वैकल्पिक स्थल क्या होंगे, इस पर आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।
नोट: बैरिकेडिंग हटाने का फैसला सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर लिया गया है, जबकि धरना स्थल की सूची से हटाने का आदेश प्रदर्शन के अधिकार पर बहस भी छेड़ सकता है।