عربی ہفتم دورہ حدیث شریف

نصر الباری شرح اردو صحیح البخاری جلد ١١
نصر الباری شرح اردو صحیح البخاری جلد ١١
نصر الباری شرح اردو صحیح البخاری جلد ١٢
نصر الباری شرح اردو صحیح البخاری جلد ١٢
نصر الباری شرح اردو صحیح البخاری جلد ١٣
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فتح اللہ الاحد بتوضيح الادب المفرد جلد ١
فتح اللہ الاحد بتوضيح الادب المفرد جلد ١
فتح اللہ الاحد بتوضيح الادب المفرد جلد ٢
فتح اللہ الاحد بتوضيح الادب المفرد جلد ٢
فتح اللہ الاحد بتوضيح الادب المفرد جلد ٣
فتح اللہ الاحد بتوضيح الادب المفرد جلد ٣
درسی سوال و جواب
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فیض المنعم شرح اردو مقدّمہ مسلم
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دروس اللغة العربية لغير الناطقين بها الجزء الأول
دروس اللغة العربية لغير الناطقين بها الجزء الأول

नबी करीम ﷺ विभिन्न सामाजिक रूपों में (पति, पिता, भाई, नाना, बेटा, ससुर और भतीजे के रूप में)

नबी करीम ﷺ विभिन्न सामाजिक रूपों में (पति, पिता, भाई, नाना, बेटा, ससुर और भतीजे के रूप में)

नबी करीम ﷺ पति के रूप में (बतौर शौहर): नबी करीम ﷺ अपने परिवार के साथ बहुत ही मोहब्बत से पेश आते थे। आपने इर्शाद फ़रमाया: "मैं तुममें से अपने परिवार के लिए सबसे बेहतर हूँ।" एक मर्तबा आप अपने घर तशरीफ़ लाए, उस वक़्त सैयदा आयशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) प्याले में पानी पी रही थीं... आपने दूर से फ़रमाया, "हुमैरा! मेरे लिए भी कुछ पानी बचा देना..." उनका नाम तो आयशा था, लेकिन नबी (अलैहिस्सलाम) उन्हें मोहब्बत की वजह से 'हुमैरा' फ़रमाते थे। (प्यार का नाम रखना भी सुन्नत है)। नबी करीम ﷺ पिता के रूप में (बतौर والد): हज़रत फ़ातिमा (रज़ियल्लाहु अन्हा) मदीने में आपके मकान से ज़रा फ़ासले पर रहती थीं। फ़रमाया: "लख़्त-ए-जिगर (दिल के टुकड़े)! तुम बहुत दूर रहती हो। मेरा जी चाहता है कि मैं तुम्हें अपने क़रीब बुला लूँ।" हज़रत हारिस को यह बात मालूम हुई तो अर्ज़ किया, "मेरा जो मकान पसंद हो हाज़िर है।" आपने हारिस को दुआएँ दीं और फिर अपने लख़्त-ए-जिगर को अपने क़रीबी मकान में बुला लिया। नबी करीम ﷺ भाई के रूप में (बतौर بھائی): रसूल-ए-अकरम ﷺ की ख़िदमत में कुछ बांदियाँ पेश की गईं, तो उनमें एक बांदी शीमा देर तक टिकटिकी बांधे आपको देखती रहीं, फिर बोलीं, "जानते हो मैं कौन हूँ? मैं तुम्हारी रज़ाई (दूध शरीक) बहन शीमा हूँ।" आपकी आँखों में आँसू आ गए... आपने अपनी चादर-ए-मुबारक अपने हाथ से बिछाई, बड़ी बहन को इज़्ज़त के साथ बिठाया, कुछ देर बातें कीं, ख़ुशी से आपका चेहरा दमक रहा था। नबी करीम ﷺ नाना के रूप में (बतौर نانا): हसनैन (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) नाना (नबी अलैहिस्सलाम) के पाँव-ए-मुबारक पर पाँव रखे खड़े थे... आपने दोनों के हाथ पकड़े और फ़रमाया, "बेटो! और ऊपर चढ़ आओ..." वे ऊपर चढ़ते-चढ़ते आपके सीने पर चढ़ आए... नाना जान ने प्यार से नवासे का मुँह चूमा... और ख़ुदा से इल्तिजा (प्रार्थना) की, "परवरदिगार! मैं इनसे प्यार करता हूँ, तू भी इनसे प्यार कर।" नबी करीम ﷺ बेटे के रूप में (बतौर بیٹا): नबी (अलैहिस्सलाम) के पास एक बूढ़ी औरत आईं, फिर निहायत इज़्ज़त के साथ उस बूढ़ी ख़ातून को बिठाया... एक सहाबी ने यह देखा तो पूछा, "ये कौन ख़ातून हैं?" लोगों ने बताया, "ये क़ाबिल-ए-एहतराम (आदरणीय) ख़ातून हलीमा सादिया हैं, जिन्होंने आपको पाला और दूध पिलाया था..." नबी करीम ﷺ ससुर के रूप में (बतौर خسر): एक बार हज़रत अली (रज़ियल्लाहु अन्हु) ने आपसे पूछा: "आप अपनी बेटी और अपने दामाद दोनों में सबसे ज़्यादा किससे मोहब्बत करते हैं?" आपने फ़रमाया: "तुमसे ज़्यादा मुझे फ़ातिमा महबूब है और फ़ातिमा से ज़्यादा तुम मुझे अज़ीज़ (प्रिय) हो।" नबी करीम ﷺ भतीजे के रूप में (बतौर بھتیجا): ग़ज़वा-ए-बद्र के क़ैदियों में आपके चाचा अब्बास क़ैद होकर आए... उनके हाथ-पाँव रस्सी और ज़ंजीरों से जकड़े थे, उनके कराहने की आवाज़ रहम-दिल भतीजे के कान में पहुँच रही थी, आप बेचैनी में बार-बार करवटें बदल रहे थे। सहाबा समझ गए कि हज़रत अब्बास (रज़ियल्लाहु अन्हु) की कराहों ने आपको बेचैन कर रखा है। लोगों ने अब्बास के बंधन ढीले कर दिए। उनके दर्द में कमी आई, कराहें बंद हुईं, तो रहमत-ए-दो-आलम को भी आराम मिला और आप सो गए। (बिखरे मोती) (किताब: माहनामह महासिने इस्लाम , सितंबर पृष्ठ: 23 नक़ल कर्ता: इस्लामिक ट्यूब प्रो ऐप)

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