बढ़ती महंगाई और जीवनयापन की मुश्किलों के खिलाफ जर्मनी के कई शहरों में हुए प्रदर्शन शनिवार रात हिंसक हो गए। मध्य फ्रैंकफर्ट में दंगाइयों ने दुकानों में तोड़फोड़ और लूटपाट की। बर्लिन, कोलोन और हैम्बर्ग में भी हिंसा की घटनाएं हुईं। दिन में प्रदर्शन ज्यादातर शांतिपूर्ण रहे थे।
प्रदर्शन किसने बुलाया और मांगें क्या थीं?
प्रदर्शनों का आयोजन 'जेन ज़ी रेगेल्ट' (जेन ज़ी ने कमान संभाली) नाम के अभियान समूह ने किया। प्रदर्शनकारी स्कूलों में पर्याप्त फंडिंग न होने, बढ़ती जीवनयापन लागत, सरकारी खर्च में कटौती और सैन्य सेवा के खिलाफ थे।
समूह की प्रवक्ता लीना फ्रेडरिख ने कहा कि ये प्रदर्शन "युद्ध और जबरदस्ती के बजाय शांति और आज़ादी" के लिए हैं। उनकी प्रमुख मांगें स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था को बेहतर समर्थन, अनिवार्य सैन्य सेवा का विरोध और बोझ का ज्यादा निष्पक्ष बंटवारा हैं।
फ्रैंकफर्ट, म्यूनिख और बर्लिन में कुल करीब 18 हजार प्रदर्शनकारी थे, जो आयोजकों के अनुमान से लगभग आधे हैं।
शहर-दर-शहर हालात
फ्रैंकफर्ट: पुलिस ने "हिंसक दंगे" की बात कही और विशेष बल तैनात किए। कई दुकानों की खिड़कियां टूटीं, जूते और अन्य सामान चोरी हुए, और आपातकालीन सेवाओं के कर्मचारियों पर मोलोटोव कॉकटेल फेंके गए। एक हथियार की दुकान की खिड़कियां भी तोड़ी गईं। एक संदिग्ध के पास से दो हथियार बरामद हुए। हेसे के गृह मंत्री रोमन पोसेक के अनुसार भीड़ में करीब 100 "वामपंथी चरमपंथी" शामिल थे। रविवार तड़के स्थिति शांत हुई।
बर्लिन: 27 पुलिसकर्मी घायल हुए और 56 लोगों को कुछ समय के लिए हिरासत में लिया गया।
कोलोन: मुख्य रेलवे स्टेशन के पास पुलिस पर बोतलें और साइकिल फेंकी गईं।
हैम्बर्ग: काले कपड़े पहने लोगों ने आतिशबाजी की और बैरिकेड्स में आग लगाई। 120 लोग गिरफ्तार हुए।
पोसेक ने कहा कि फ्रांस को मॉडल के तौर पर पेश नहीं किया जाना चाहिए। कोलोन के पुलिस प्रमुख जोहानेस हरमान्स ने अफसोस जताया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन चाहने वाले युवाओं के बीच हिंसा चाहने वाले चरमपंथी घुस आए।
यूरोप के दूसरे देशों में भी प्रदर्शन
फ्रांस: लगातार तीसरे सप्ताहांत 3 लाख 20 हजार से ज्यादा लोगों ने प्रदर्शन किया, जो ज्यादातर शांतिपूर्ण रहा। तूलूज़, लियोन और मार्सेय में झड़पों के बाद 500 से ज्यादा गिरफ्तारियां हुईं।
इटली: रोम और ट्यूरिन में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं।
पुर्तगाल: किराये से जुड़े विधेयक के खिलाफ मार्च के बाद बने अस्थायी शिविर को पुलिस ने हटाया। देश में एक दशक में मकानों की कीमतें दोगुने से ज्यादा हो चुकी हैं।
युवाओं का गुस्सा, मुद्दा एक
फ्रांस, बेल्जियम, आयरलैंड, स्पेन, पुर्तगाल, इटली, ग्रीस, सर्बिया और अल्बानिया समेत कई देशों में युवा सड़कों पर हैं। मांगें अलग-अलग हैं, लेकिन मुख्य विरोध रोजमर्रा की चीजों की बढ़ती लागत, किफायती आवास की कमी, शिक्षा की गुणवत्ता और सार्वजनिक सेवाओं में कटौती को लेकर है।