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فارسی کی پہلی کتاب مترجم
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گوہر بےبہا شرحِ اردو کریمہ
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درسِ آثار السنن
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امام ابوداؤد اور اُن کی سنن کا تعارف
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مبادیات ہدایہ
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अध्ययन का अनोखा लाभ

अध्ययन का अनोखा लाभ

शेख़ सलमान अल-औदा अपनी किताब "ज़ंज़ाना" में लिखते हैं कि: एक मर्तबा मैंने अपने शेख़ से शिकायत की कि: मैंने एक किताब पढ़ी लेकिन मुझे उसमें से कुछ भी याद नहीं रहा, चुनाँचे उन्होंने मुझे एक खजूर दी और फ़रमाया: लो यह चबाओ! फिर मुझसे पूछा: क्या अब तुम बड़े हो गए? मैंने कहा: नहीं, फ़रमाया: लेकिन यह खजूर तुम्हारे जिस्म में घुल-मिल गई, चुनाँचे इसका कुछ हिस्सा गोश्त बना, कुछ हड्डी, कुछ पट्ठा (मांसपेशी), कुछ खाल, कुछ बाल, कुछ नाखून और मसाम (रोमकूप) वग़ैरह। तब मैंने जाना कि जो किताब भी मैं पढ़ता हूँ वह तक़सीम (अवशोषित) हो जाती है, चुनाँचे उसका कुछ हिस्सा मेरी लुग़त (शब्दावली) मज़बूत करता है, कुछ मेरा इल्म (ज्ञान) बढ़ाता है, कुछ अख़्लाक़ (नैतिकता) सँवारता है, कुछ मेरे लिखने-बोलने के उस्लूब (शैली) को तरक़्क़ी देता है; अगरचे मैं इसको महसूस नहीं कर पाता। एक चीनी कहावत है कि "जब आदमी 10 किताबें पढ़ता है तो वह 10 हज़ार मील का सफ़र कर लेता है।" गोरच फॉक किताब के बारे में कहते हैं: "अच्छी किताबें वे नहीं जो हमारी भूख को ख़त्म कर दें, बल्कि अच्छी किताबें वे हैं जो हमारी भूख बढ़ाएँ... ज़िंदगी को जानने की भूख..."

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