عربی سوم

انوار التہذیب شرحِ شرحِ تہذیب
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مفتاح التہذیب اردو شرح شرح تہذیب
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ایضاح المطالب شرح اردو کافیہ
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کاشفہ شرحِ کافیہ
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کشف المطالب شرح اردو کافیہ
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تہذیب الکافیہ شرحِ کافیہ
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نفحۃ العرب
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تکمیل الادب شرح اردو نفحۃ العرب
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مشکٰوۃ المصابیح جلد 1
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काष हम भी ऐसे मुसलमान बन जाएं

काष हम भी ऐसे मुसलमान बन जाएं

अल्जीरिया से ताल्लुक रखने वाली नामी और अरब दुनिया की सबसे मक़बूल (लोकप्रिय) एंकर और पत्रकार ख़दीजा बिन्त क़ुन्हा अपने दौरा-ए-अमेरिका (अमेरिका यात्रा) के बारे में बताती हैं कि वह एक सुपरस्टोर में शॉपिंग के बाद काउंटर पर भुगतान (पेमेंट) के लिए अपनी बारी का इंतज़ार कर रही थीं कि इसी दौरान एक बाहिजाब (हिजाब पहने हुए) मुसलमान महिला एक बड़ा सा बॉक्स खींचते हुए दाखिल हुईं। बॉक्स ग़ालिबन (शायद) घास काटने वाली मशीन (लॉन मूवर) का था। महिला के चेहरे पर थकान के आसार साफ़ दिख रहे थे। वह महिला काउंटर पर खड़ी कैशियर मुलाज़िमा के पास गईं और बड़े अदब के साथ कहने लगीं कि "यह मशीन कल मैं आपसे अन्य सामान के साथ ५०० डॉलर में ख़रीद कर ले गई थी।" कैशियर: "क्या आप इसे वापस करना चाहती हैं?" मुसलमान महिला: "नहीं।" कैशियर मुलाज़िमा: "क्या आपने किसी दूसरे स्टोर पर इसे इससे कम क़ीमत में बिकते देखा है? हमारी पॉलिसी आपको बक़िया रक़म (अंतर) वापस करने की भी है, मगर इसके लिए आपको दूसरे स्टोर की क़ीमत का सबूत दिखाना होगा।" मुसलमान महिला कहने लगीं, "इन वजहों में से कुछ नहीं है। बल्कि मैंने कल आपसे अन्य चीज़ों के साथ यह मशीन ख़रीदी थी, जिसका भुगतान क्रेडिट कार्ड के ज़रिए कर दिया गया था। फिर इस सामान को उठाकर मैं अपने निवास स्थान पर ले गई, जो यहाँ से तक़रीबन दो घंटे की दूरी पर स्थित है। लेकिन जब घर पहुँची और बिल देखा तो मुझे मालूम हुआ कि आपने मुझसे अन्य चीज़ों की क़ीमत तो वसूल की है, मगर इस मशीन की क़ीमत लगाना भूल गई थीं।" यह सुनते ही कैशियर मुलाज़िमा ने उठकर महिला को गले लगा लिया और आँखों में आते आँसुओं को रोकने की कोशिश करते हुए भावुक लहज़े में कहने लगी कि "फिर किस चीज़ ने आपको ४ घंटे का सफ़र तय करने और नौकरी से छुट्टी लेने पर मजबूर कर दिया?" मुसलमान महिला ने बड़ी सादगी से बोला, "अमानतदारी (ईमानदारी) ने।" और फिर अंग्रेज़ी में उसे अमानत के बारे में इस्लामी शिक्षाओं की व्याख्या करने लगीं। यह सुनकर मुलाज़िमा उठकर शीशे के केबिन में बैठी हुई मैनेजर महिला के पास गईं। हम सुन नहीं रहे थे मगर उसकी बॉडी लैंग्वेज से उसके हाव-भाव बता रहे थे कि वह कुछ ख़ास अंदाज़ से कुछ कह रही है। मुलाज़िमा रुकी, तो मैनेजर महिला अपनी सीट से उठीं और बाहर आ गईं। उन्होंने स्टोर के पूरे स्टाफ़ को इकट्ठा कर लिया, जिसके साथ ग्राहक (कस्टमर्स) भी जमा हो गए। उन्हें इस मुसलमान महिला की अमानतदारी के बारे में बताने लगीं। मुसलमान महिला ख़ामोश खड़ी रहीं, जिनके चेहरे पर हया (शालीनता) की परछाइयाँ बिखरी हुई थीं। यह सुनने के बाद स्टाफ़ ने मुसलमान महिला से इस्लाम में अमानत और दयानतदारी (ईमानदारी) के बारे में सवाल किए, जिसके जवाब उन्होंने धार्मिक ज्ञान की रोशनी में बड़े नपे-तुले अंदाज़ में दे दिए। मैनेजर महिला ने मुसलमान महिला को वह मशीन गिफ़्ट करने की पेशकश की, जिसे उन्होंने बड़ी शालीनता से ठुकराते हुए कहा कि इसके लिए मशीन से ज़्यादा अहमियत सवाब (पुण्य) की है। वह क़ीमत का भुगतान करके और शुक्रिया अदा करके स्टोर से निकल गईं। इस वाक़ये को सुपरस्टोर में मौजूद दर्जनों ग्राहकों ने भी देखा, जो हिजाब पहने, एक दिलकश मुस्कान और ईमान की ताक़त के आभा-मंडल (हौले) में घिरी हुई स्टोर से विदा होने वाली महिला को बड़ी हैरत से देख रहे थे। ख़दीजा बिन्त क़ुन्हा कहती हैं कि यह सुनकर और देखकर अपने मुसलमान होने पर बड़ा फ़ख़्र (गर्व) महसूस हुआ और वह भी पेमेंट करके और शुक्र अदा करके सुपरस्टोर से बाहर आ गई। ला इलाहा इल्लल्लाह मुहम्मदुर रसूलुल्लाह 🌾 पढ़ने के बाद अगर इंसान के अंदर दो ख़ूबियाँ हों: १ : ख़ौफ़-ए-ख़ुदा (ईश्वर का डर) २ : अच्छे अख़्लाक़ (अच्छा व्यवहार/चरित्र) तो समाज उस व्यक्ति की कद्र करता है, और यही दो ख़ूबियाँ मरने के बाद इंसान को जन्नत में ले जा सकती हैं। इन्शाअल्लाह। "काष हम भी ऐसे मुसलमान बन जाएं" _______________________________________ मनकूल (साभार)। चयन: इस्लामिक ट्यूब

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