عربی دوم

سعایۃ النحو شرحِ اردو ہدایۃ النحو
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موطا امام مالک مترجم
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المؤطا
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تسہیل المیبذی
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اشرف المرضی شرحِ اردو میبذی
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سراج التھذیب فی حل شرح التھذیب
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شفاء الارواح شرح نور الایضاح
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شرح تہذیب
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تسہیل اصول الشاشی
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चौधरी साहब का त्याग और धार्मिक विद्वानों से प्रेम

चौधरी साहब का त्याग और धार्मिक विद्वानों से प्रेम

...मदरसा के छात्रों के लिए एक चौधरी साल भर का गेहूं मदरसा के लिए वक्फ (दान) करता था। किसी शरारती (द्वेषी) शख्स ने मौलाना साहब के बारे में दुश्मनी और नफरत का इजहार ऐसा किया कि पता मालूम करते-करते चौधरी के घर पहुंच गया और कहने लगा: "चौधरी साहब! मदरसे जाकर पता तो करें कि छात्रों के नाम पर क्या खियानत (धोखाधड़ी/हेराफेरी) हो रही है! आधा गेहूं मदरसा में... और आधा मौलवी साहब के घर..." अल्लाह चौधरी की कब्र पर रहमत करे जहां वह गुमनाम मुजाहिद सो रहा है... चौधरी उठा... उस शरारती शख्स को गले लगाया और शुक्रिया अदा करके कहने लगा, "यार! तू पहले क्यों नहीं आया? यह बात बता कर तूने मेरी मदद कर दी। आज से साल भर का गेहूं मौलाना के घर के लिए और साल भर का अलग गेहूं मदरसा के लिए..." जो आखिरी अल्फाज चौधरी ने कहे, वे सोने के पानी से लिखने के लायक हैं। कहने लगा: "सुन! छात्रों का खाना भी बड़ी बात है, मगर मेरे लिए फख्र (गर्व) की बात यह है कि वक्त का मुहद्दिस (हदीस का विद्वान) मेरा गेहूं खाता है, जिसका सारा दिन 'क़ालल्लाह' (अल्लाह ने फरमाया) और 'क़ाल रसूलुल्लाह' (अल्लाह के रसूल ने फरमाया) पढ़ते-पढ़ाते गुजर जाता है... जिसके सवाब (पुण्य) में मुझे कोई शक नहीं है।" अल्लाह-हु-अकबर _____________________________________ मनकूल (साभार)। चयन: इस्लामिक ट्यूब प्रो ऐप

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