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پنج گنج
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نور الانوار مع شرح قمر الاقمار
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نصر الوقایہ شرح اردو شرح وقایہ
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فتح الوقایہ لحل شرح الوقایہ
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شرح وقایہ
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سنن ابن ماجہ عربی اردو
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سنن نسائی مترجم
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صحیح البخاری جلد 1
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صحیح البخاری جلد 2
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सहाबा की शान पर एक अनोखा लेख

सहाबा की शान पर एक अनोखा लेख

लेखक: मुहद्दिस-ए-अस्र अल्लामा सैयद मुहम्मद यूसुफ बनूरी (रहमतुल्लाह अलैह) बात तो बिल्कुल साफ है कि सहाबा (पैगंबर के साथी) जैसे भी हों, मगर वे तुम से तो अच्छे ही होंगे। तुम हवा में उड़ लो, आसमान पर पहुँच जाओ, सौ बार मर कर जी लो, मगर तुम से सहाबी तो नहीं बना जा सकेगा। तुम आखिर वह आँख कहाँ से लाओगे जिसने मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के जहाँ-आरा (दुनिया को संवारने वाले) हुस्न का दीदार किया? वे कान कहाँ से लाओगे जो नुबुव्वत (पैगंबरी) के शब्दों से धन्य हुए? हाँ, वह दिल कहाँ से लाओगे जो मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की मसीहाई साँसों से ज़िंदा हुआ? वह दिमाग कहाँ से लाओगे जो मुकद्दस (पवित्र) नूर से रोशन हुआ? तुम वे हाथ कहाँ से लाओगे जो एक बार मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के जिस्म-ए-मुबारक से छुए और सारी उम्र उनकी अंबर जैसी खुशबू नहीं गई? तुम वे पाँव कहाँ से लाओगे जो मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की संगति में छालों से भर गए थे? तुम वह ज़माना कहाँ से लाओगे जब आसमान ज़मीन पर उतर आया था? तुम वह जगह कहाँ से लाओगे जहाँ दोनों जहानों के सरदार का जलवा था? तुम वह महफ़िल कहाँ से लाओगे जहाँ दोनों जहानों की कामयाबी की पाक शराब के जाम भर-भर कर दिए जाते थे और मोहब्बत के प्यासे मस्ताने होकर "क्या कुछ और भी है?" (هل من مزید) का नारा लगा रहे थे? तुम वह मंज़र कहाँ से लाओगे जो "मानो मैं अल्लाह को अपनी आँखों से देख रहा हूँ" (کأنّی أرَی اللہ عیاناً) का कैफ (आनंद) पैदा करता था? तुम वह मजलिस कहाँ से लाओगे जहाँ "मानो हमारे सरों पर परिंदे बैठे हों" (کأنّما علی رؤوسنا الطّیر) का समां बंध जाता था? तुम रिसालत के तख्त पर बैठने वाले वह सदर-नशीं (मुख्य गद्दी पर विराजमान पैगंबर) कहाँ से लाओगे जिनकी तरफ "यह तकिया लगाए हुए गोरे रंग वाले" (ھذا الأبیض المتکیٔ) कहकर इशारे किए जाते थे? तुम वह अंबर की खुशबू कहाँ से लाओगे जो महबूब के दीदार में आधी रात की नींद को हराम कर देती थी? तुम वह ईमान कहाँ से लाओगे जो सारी दुनिया को त्याग कर हासिल किया जाता था? तुम वे अमल कहाँ से लाओगे जो नुबुव्वत के पैमाने से नाप-नाप कर अदा किए जाते थे? तुम वह अख्लाक (चरित्र) कहाँ से लाओगे जो मुहम्मी आईना सामने रखकर संवारे जाते थे? तुम वह रंग कहाँ से लाओगे जो "अल्लाह के रंग" (صبغۃ اللہ) की भट्टी में दिया जाता था? तुम वे अदाएँ कहाँ से लाओगे जो देखने वालों को दीवाना (अधमरा) बना देती थीं? तुम वह नमाज़ कहाँ से लाओगे जिसके इमाम नबियों के इमाम थे? तुम फरिश्तों और पवित्र लोगों की वह जमात कैसे बन सकोगे जिसके सरदार रसूलों के सरदार थे? तुम मेरे सहाबा को लाख बुरा कहो, मगर अपने ज़मीर (अन्तरात्मा) का दामन झंझोड़ कर बताओ! अगर इन तमाम नेमतों के बाद भी मेरे सहाबा बुरे हैं तो क्या तुम उनसे बदतर नहीं हो? अगर वे आलोचना और मलामत के हकदार हैं, तो क्या तुम लानत और गज़ब के हकदार नहीं हो? अगर तुम मेरे सहाबा को बदनाम करते हो, तो क्या मेरा खुदा तुम्हें महशर (कयामत के दिन) सबके सामने रुसवा नहीं करेगा? अगर तुम में इंसाफ और हया की कोई किरण बाकी है, तो अपने गरेबान में झाँको और मेरे सहाबा के बारे में अपनी ज़बान बंद करो। और अगर तुम्हारा ज़मीर बिल्कुल मर चुका है, तो पूरी दुनिया यह फैसला करेगी कि क्या मेरे सहाबा पर आलोचना करने का हक इन कपूतों (नालायक बेटों) को होना चाहिए? _____📝📝📝_____ मनकूल (नकल किया गया)। इंतखाब (चयन) इस्लामिक ट्यूब प्रो ऐप।

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