عربی ہفتم دورہ حدیث شریف

انعام الباری جلد 7
انعام الباری جلد 7
تحفۃ الالمعی جلد 1
تحفۃ الالمعی جلد 1
تحفۃ الالمعی جلد 2
تحفۃ الالمعی جلد 2
تحفۃ الالمعی جلد 3
تحفۃ الالمعی جلد 3
تحفۃ الالمعی جلد 4
تحفۃ الالمعی جلد 4
تحفۃ الالمعی جلد 5
تحفۃ الالمعی جلد 5
تحفۃ الالمعی جلد 6
تحفۃ الالمعی جلد 6
تحفۃ الالمعی جلد 7
تحفۃ الالمعی جلد 7
تحفۃ الالمعی جلد 8
تحفۃ الالمعی جلد 8

मुल्ला नसीरुद्दीन का अमीर तैमूर को अनोखा मशवरा

मुल्ला नसीरुद्दीन का अमीर तैमूर को अनोखा मशवरा

एक दिन अमीर तैमूर लंग दरबार लगाए बैठा था। दरबारी अदब के साथ अपनी-अपनी जगहों पर खड़े हुए थे। तैमूर ने बगदाद के ख़लीफ़ाओं का हवाला देते हुए कहा, "उनके अलक़ाब (उपाधियाँ) बड़े आलीशान और रौबदार होते हैं। जैसे मुस्तक़ज़िर बिल्लाह, वासिक़ बिल्लाह, मोतसिम बिल्लाह और मुतवक्किल बिल्लाह वगैरह। मैं चाहता हूँ कि मैं भी इसी तरह का कोई लक़ब (उपाधि) इख़्तियार करूँ।" दरबारियों ने अपनी-अपनी समझ के मुताबिक़ अलग-अलग अलक़ाब पेश किए... जब मुल्ला नसीरुद्दीन की बारी आई, तो उन्होंने जान की अमान (सुरक्षा) माँगते हुए अर्ज़ किया, "इस नाचीज़ के ख़्याल में हुज़ूर का लक़ब 'नऊज़ु बिल्लाह' (हम अल्लाह की पनाह माँगते हैं) बहुत मुनासिब (मोज़ूँ) रहेगा।" (सौजन्य से: मासिक पत्रिका "हुमा", नई दिल्ली: जनवरी 1995, पृष्ठ: 77)

सबसे हालिया

Naats